रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने निवेशकों को दिवाली का बड़ा तोहफा देते हुए अपनी डिजिटल और टेलीकॉम इकाई, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तारीखों का ऐलान कर दिया है। यह सार्वजनिक निर्गम भारत के पूंजी बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होने जा रहा है। बुधवार को दाखिल किए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर 2024 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर 2024 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर 2024 को आयोजित की जाएगी।
ऐतिहासिक मूल्यांकन और निर्गम का आकार
जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया के 2024 के आईपीओ को पीछे छोड़ देगा, जो वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स लगभग 106 अरब डॉलर यानी करीब 10 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के मूल्यांकन का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए संभावित प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर लगभग 30 हजार 200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। बाजार में चर्चा है कि इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1 हजार 65 रुपये से लेकर 1 हजार 119 रुपये प्रति शेयर के बीच तय किया जा सकता है, हालांकि निवेशक अभी अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। लिस्टिंग के बाद जियो भारत की सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियों की सूची में शामिल हो जाएगी।
शेयरधारकों और कर्मचारियों के लिए विशेष आरक्षण
इस मेगा आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने कर्मचारियों और मौजूदा शेयरधारकों का विशेष ध्यान रखा है। कंपनी ने योग्य कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए हैं। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) के योग्य शेयरधारकों के लिए 2 हजार 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। वे व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) जिनके पास 14 अक्टूबर 2024 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पब्लिक इक्विटी शेयर थे, वे शेयरधारक आरक्षण श्रेणी के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे। यह कदम रिलायंस के दीर्घकालिक निवेशकों को सीधे लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पूंजी का उपयोग और वित्तीय संरचना
जियो का यह आईपीओ पूरी तरह से एक नया इश्यू है, जिसमें 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई 'ऑफर-फॉर-सेल' (ओएफएस) शामिल नहीं है। इसका अर्थ यह है कि मेटा, गूगल, मुबाडाला और सऊदी अरब के पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड जैसे बड़े रणनीतिक निवेशक इस ऑफर में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं और आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि सीधे जियो प्लेटफॉर्म्स के पास जाएगी। ड्राफ्ट पेपर्स के अनुसार, इस कमाई का 27 हजार 500 करोड़ रुपये तक का हिस्सा मुख्य रूप से रिलायंस जियो इन्फोकॉम से जुड़े कर्ज को चुकाने या समय से पहले भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों और भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए होगा।
बाजार का अनुमान और ग्रे मार्केट का रुझान
बाजार के जानकारों का अनुमान है कि 10 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के मौजूदा मूल्यांकन पर जियो का ट्रेड इसके अनुमानित वित्त वर्ष 2028 के ईवी/एबिटडा के लगभग 12 गुना पर होगा। इसकी तुलना में भारती एयरटेल का भारतीय कारोबार लगभग 10 दशमलव 3 गुना पर ट्रेड करता है। बोनान्जा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के अनुसार, यह कीमत बहुत कम होने के बजाय उचित और थोड़ी सावधानीपूर्ण लग रही है, जो भविष्य में कमाई और टैरिफ में बढ़ोतरी के साथ निवेशकों को अच्छी बढ़त की गुंजाइश देती है और ग्रे मार्केट में भी इस आईपीओ को लेकर जबरदस्त उत्साह है। जियो के शेयर लगभग 218 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि 1 हजार 119 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इसकी संभावित लिस्टिंग 1 हजार 337 रुपये के आसपास हो सकती है।
जियो का विस्तृत बिजनेस पोर्टफोलियो
जियो को केवल एक टेलीकॉम कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि एक संपूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में पेश किया जा रहा है। इसके बिजनेस में मोबाइल सेवाएं, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, क्लाउड कंप्यूटिंग, मनोरंजन, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेवाएं शामिल हैं। मार्च 2024 तक कंपनी के पास लगभग 52 करोड़ 40 लाख सब्सक्राइबर्स का विशाल आधार था। इस आईपीओ में वैश्विक निवेशकों ने भी गहरी रुचि दिखाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिडेलिटी, एलियांज और कैपिटल ग्रुप जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ-साथ घरेलू संस्थानों से अब तक 20 अरब डॉलर से ज्यादा की बोलियां मिलने की संभावना जताई गई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज पर प्रभाव
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए यह आईपीओ उसके सबसे तेजी से बढ़ते बिजनेस के लिए एक स्वतंत्र बाजार मूल्य निर्धारित करेगा। लिस्टिंग के बाद निवेशक जियो की वैल्यू को रिलायंस के अन्य व्यवसायों जैसे ऑयल-टू-केमिकल्स, रिटेल और न्यू एनर्जी से अलग देख पाएंगे। हालांकि, रिलायंस के शेयरों पर इसका असर अंतिम मूल्यांकन और सब्सक्रिप्शन की मांग पर निर्भर करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि लिस्टिंग के बाद भी जियो का बड़ा हिस्सा रिलायंस के पास ही रहेगा, इसलिए वैल्यू अनलॉकिंग की प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरी होगी। यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने वाला है।
