कच्चे तेल की कीमतों ने बिगाड़ा खेल, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे टूटा रुपया

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 47 पैसे गिरकर 95 रुपये 73 पैसे पर बंद हुआ। इससे पहले लगातार तीन दिनों तक रुपये में मजबूती देखी गई थी, जिस पर अब ब्रेक लग गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भारतीय रुपये की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 47 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से रुपये में जो मजबूती देखी जा रही थी, वह अब खत्म हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है। हालांकि मंगलवार को डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट रही, लेकिन कच्चे तेल की महंगाई के सामने रुपया टिक नहीं सका और उसे मोटा नुकसान उठाना पड़ा।

करेंसी बाजार में रुपये की स्थिति

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 रुपये 43 पैसे पर खुला था। दिनभर के कारोबार के दौरान इसमें काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। रुपये ने डॉलर के मुकाबले 95 रुपये 33 पैसे का उच्चतम स्तर और 95 रुपये 76 पैसे का निचला स्तर छुआ। कारोबार की समाप्ति पर रुपया 95 रुपये 73 पैसे के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 47 पैसे कम है। इससे पहले सोमवार को रुपये में अच्छी मजबूती देखी गई थी और यह 34 पैसे बढ़कर 95 रुपये 26 पैसे पर बंद हुआ था। सोमवार की उस तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई द्वारा डॉलर की बिक्री और रुपये की मांग को बनाए रखना मुख्य कारण था।

कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर

रुपये की इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ट्रेड में 3 पॉइंट 43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99 डॉलर 94 सेंट प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। तेल की कीमतों में यह उछाल उन खबरों के बाद आया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं। इन हमलों की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए किसी भी संभावित समझौते की उम्मीदें फिलहाल खत्म होती दिख रही हैं। विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी करेंसी की मजबूती रुपये को कमजोर बना रही है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान

मीराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने बाजार की स्थिति पर अपनी राय साझा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी अनिश्चितता और मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाई की चिंताओं के कारण आने वाले समय में भी रुपया नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार कर सकता है और हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ऊंचे स्तरों से कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आती है, तो इससे निचले स्तरों पर रुपये को सहारा मिल सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये की हाजिर कीमत यानी स्पॉट प्राइस 95 रुपये 20 पैसे से लेकर 95 रुपये 85 पैसे की रेंज में ट्रेड कर सकती है।

शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों का रुख

रुपये में गिरावट के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली और सेंसेक्स 479 पॉइंट 26 अंक गिरकर 76009 पॉइंट 70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 118 अंक गिरकर 23913 पॉइंट 70 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, एक्सचेंज डेटा के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई सोमवार को शुद्ध खरीदार रहे थे और उन्होंने 821 करोड़ 75 लाख रुपये के शेयर खरीदे थे। इसके बावजूद मंगलवार को बाजार का मूड बिगड़ा रहा और रुपये के साथ-साथ शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया।

वैश्विक घटनाक्रम और राजनीतिक बयान

वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0 पॉइंट 19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99 पॉइंट 05 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अंतिम फैसले पर पहुंचने में अभी समय लग सकता है। इसका कारण यह है कि तेहरान अपने सर्वोच्च नेता से परामर्श करने के लिए एक जटिल संचार नेटवर्क का उपयोग करता है और इन तमाम वैश्विक परिस्थितियों के बीच रुपये की चाल आने वाले दिनों में कच्चे तेल और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर निर्भर करेगी।