लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक पिछले 110 दिनों से अधिक समय से जोधपुर जेल में बंद हैं। लेकिन जेल की चारदीवारी भी उनके वैज्ञानिक दिमाग और खोजी प्रवृत्ति को शांत नहीं कर पाई है। उनकी पत्नी और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक गीतांजलि जे. आंगमो ने हाल ही में उनसे मुलाकात के बाद कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं और वांगचुक ने जेल के भीतर अपने समय का उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगों और प्रकृति के अध्ययन के लिए करने का निर्णय लिया है।
चींटियों की दुनिया में दिलचस्पी
गीतांजलि आंगमो ने बताया कि वांगचुक ने उनसे विशेष रूप से चींटियों पर एक किताब मांगी थी। उनके बड़े भाई ने उन्हें 'एंट्स: वर्कर्स ऑफ द वर्ल्ड' नामक पुस्तक भेंट की है, जिसे एलेनोर स्पाइसर राइस और एडुआर्ड फ्लोरिन निगा ने लिखा है। वांगचुक का मानना है कि चींटियों के समुदाय में गजब की एकता और टीम भावना होती है। वे जेल की बैरक में अकेले रहते हुए इन छोटे जीवों के व्यवहार का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं और उनका उद्देश्य यह समझना है कि कैसे ये छोटे जीव एक जटिल और अनुशासित समाज का निर्माण करते हैं, जिससे मनुष्य भी बहुत कुछ सीख सकता है।
जेल बैरकों के लिए इको-रेस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर
सोनम वांगचुक केवल चींटियों तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपनी पत्नी से एक थर्मामीटर की भी मांग की है। इसके पीछे का उद्देश्य जेल की बैरकों के तापमान और वहां के वातावरण का अध्ययन करना है। वांगचुक 'इको-रेस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर' पर काम करना चाहते हैं और वे यह देखना चाहते हैं कि जेल की मौजूदा इमारतों को कैसे अधिक पर्यावरण के अनुकूल और रहने योग्य बनाया जा सकता है। वे जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांग रहे हैं कि क्या उन्हें कुछ वैज्ञानिक उपकरण मिल सकते हैं ताकि वे अपने शोध को आगे बढ़ा सकें।
हिरासत और कानूनी लड़ाई
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था और उन पर लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी जिसमें कई लोग घायल हुए थे। हालांकि, उनके समर्थकों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लद्दाख के पर्यावरण और अधिकारों की रक्षा की बात कर रहे थे और गीतांजलि ने उनकी रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दायर की है, जिस पर 29 जनवरी को सुनवाई होनी है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाएं
वांगचुक का यह व्यवहार दर्शाता है कि एक रचनात्मक व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता और जेल की बैरक उनके लिए एक प्रयोगशाला बन गई है। वे वहां जलवायु परिवर्तन और उसके समाधानों पर भी किताबें पढ़ रहे हैं और उनकी पत्नी ने अपील की है कि उन्हें जल्द रिहा किया जाना चाहिए ताकि वे देश के लिए अपना महत्वपूर्ण कार्य जारी रख सकें। लद्दाख में उनके द्वारा किए गए 'आइस स्टूपा' और सौर ऊर्जा से चलने वाले टेंट जैसे नवाचारों ने पूरी दुनिया। का ध्यान खींचा है, और अब जेल के भीतर उनके ये नए प्रयोग भी चर्चा का विषय बन गए हैं।
I met @Wangchuk66 yesterday and finally gave him the book on Ants, a gift from his eldest brother, along with books on climate change and its solution that he had requested. He asked me to check with the jail administration and the #SupremeCourtofIndia if he can get instruments… pic.twitter.com/O2guuLqaFJ
— Gitanjali J Angmo (@GitanjaliAngmo) January 21, 2026
