ट्रंप और नेतन्याहू का ईरान में अहमदीनेजाद को सत्ता सौंपने का गुप्त प्लान हुआ ध्वस्त

अमेरिका और इजराइल की ईरान में सत्ता परिवर्तन कर पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को गद्दी पर बिठाने की गुप्त योजना विफल हो गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अहमदीनेजाद को नजरबंदी से छुड़ाने के लिए किए गए हमले में उनके घायल होने के बाद यह पूरी योजना ध्वस्त हो गई।

हालिया घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ युद्ध में उतरते समय शायद गलत आकलन किया था। वे इस उम्मीद में थे कि वे बहुत जल्द ही अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन उन्होंने ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की एक ऐसी जोखिम भरी योजना पर दांव लगा दिया जो अंततः विफल रही। अमेरिका और इजराइल ने ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने के मकसद से हमला कर वहां जोरदार तबाही मचाई, लेकिन वे सत्ता परिवर्तन करने में सफल नहीं हो सके।

अहमदीनेजाद को सत्ता सौंपने की गुप्त योजना

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति है, लेकिन इस बीच यह दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों की असल योजना ईरान में तख्तापलट कर महमूद अहमदीनेजाद को गद्दी सौंपने की थी और न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले के बाद अमेरिका और इजराइल की शुरुआती योजना ईरान में सत्ता परिवर्तन कर अहमदीनेजाद को नेतृत्व सौंपने की थी। हालांकि, अहमदीनेजाद के घर पर हुए एक हमले के बाद पूरी स्थिति बदल गई। यह बात इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि अहमदीनेजाद की छवि हमेशा से इजराइल के कट्टर विरोधी के रूप में रही है।

अखबार के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि तेहरान में अहमदीनेजाद को नजरबंदी से आजाद कराने के लिए एक विशेष हमला किया गया था। यह हमला देश में सत्ता परिवर्तन लाने और उन्हें सत्ता में बिठाने की कोशिश का ही एक हिस्सा था। युद्ध की शुरुआती झड़पों में जब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी और अन्य शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने की खबरें आईं, तब राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह विचार व्यक्त किया था कि अच्छा यही होगा यदि ईरान के "अंदर से ही कोई" देश की बागडोर संभाल ले।

नजरबंदी से आजादी का प्रयास और विफलता

अब यह खुलासा हुआ है कि अमेरिका और इजरायल इस जंग में महमूद अहमदीनेजाद को ध्यान में रखकर उतरे थे। अहमदीनेजाद, जो 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे, अपने कट्टरपंथी और अमेरिका-विरोधी विचारों के लिए जाने जाते थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इजरायलियों द्वारा तैयार की गई इस साहसिक योजना के बारे में अहमदीनेजाद से भी चर्चा की गई थी, लेकिन यह योजना बहुत जल्द ही नाकाम हो गई।

अमेरिकी अधिकारियों और अहमदीनेजाद के एक सहयोगी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के पहले ही दिन, तेहरान स्थित अहमदीनेजाद के घर पर इजरायल की ओर से हमला किया गया था। इस हमले का मुख्य उद्देश्य उन्हें हाउस अरेस्ट यानी नजरबंदी की स्थिति से मुक्त कराना था। हालांकि, इस हमले में अहमदीनेजाद घायल हो गए। वे इस हमले में बाल-बाल तो बच गए, लेकिन इस अनुभव के बाद उनका सत्ता परिवर्तन की इस योजना से मोहभंग हो गया और उन्होंने इससे दूरी बना ली।

अहमदीनेजाद की वर्तमान स्थिति और इतिहास

इस हमले के बाद से अहमदीनेजाद को अब तक सार्वजनिक रूप से कहीं नहीं देखा गया है। फिलहाल वह कहां हैं और किस हाल में हैं, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। अहमदीनेजाद का सत्ता परिवर्तन के लिए चुनाव करना एक असामान्य कदम माना जा रहा था, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने उन पर कड़ी निगरानी रखी हुई थी। अपने राष्ट्रपति काल के दौरान वह इजराइल को दुनिया के नक्शे से मिटा देने के अपने बयानों के लिए चर्चित रहे थे। वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रबल समर्थक और अमेरिका के कट्टर आलोचक भी थे।

सत्ता परिवर्तन को लेकर अहमदीनेजाद को इस योजना में शामिल होने के लिए कैसे राजी किया गया, यह अब भी एक रहस्य है। यह कोशिश इजरायल द्वारा ईरान की धर्म-आधारित सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार की गई एक बहु-चरणीय योजना का हिस्सा थी। यह घटना रेखांकित करती है कि कैसे ट्रंप और नेतन्याहू ने एक ऐसी योजना पर दांव लगाया, जिसे खुद ट्रंप के कुछ सहयोगी भी "असंभव" या "अविश्वसनीय" मानते थे।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने इस संबंध में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लक्ष्यों को लेकर स्पष्ट थे, जिसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, उत्पादन केंद्रों और नौसेना को तबाह करना शामिल था और वहीं, इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रवक्ता ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।