रूस से डीजल डील पर ट्रंप के खिलाफ अपनी ही पार्टी के सांसद, रोकने के लिए लाएंगे बिल

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से 3 लाख टन डीजल खरीदने के फैसले पर अमेरिका में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक इस सौदे को रोकने के लिए संसद में बिल पेश करेंगे, जबकि भारत और चीन पर प्रतिबंधों की तलवार लटकी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से डीजल खरीदने के हालिया फैसले ने उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने रूस से 3 लाख टन डीजल की आपूर्ति के लिए एक समझौते की घोषणा की है। इस फैसले का विरोध करते हुए रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने स्पष्ट किया है कि वह इस सौदे को रोकने के लिए अमेरिकी संसद में एक नया बिल पेश करेंगे और इस कदम को डेमोक्रेटिक सांसदों का भी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे ट्रंप प्रशासन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब अमेरिका पहले से ही रूस पर कड़े प्रतिबंध लागू कर चुका है।

पुतिन के साथ डील और सांसदों की नाराजगी

शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई विस्तृत चर्चा के बाद इस बड़े सौदे का खुलासा हुआ। ट्रंप ने घोषणा की कि रूस तुरंत 3 लाख टन डीजल की सप्लाई करेगा, जिसे अमेरिका और दुनिया के अन्य बाजारों में भेजा जाएगा। हालांकि, इस फैसले ने अमेरिकी सांसदों को नाराज कर दिया है क्योंकि यह कदम उन प्रतिबंधों के खिलाफ जाता है जो रूस पर लगाए गए थे। गौरतलब है कि सितंबर के महीने में ही अमेरिकी संसद ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला एक महत्वपूर्ण कानून पारित किया था, जिसका उद्देश्य रूस की आर्थिक शक्ति को सीमित करना था। सांसदों का तर्क है कि इस तरह की डील से रूस को आर्थिक मजबूती मिलेगी, जो अमेरिकी हितों के खिलाफ है।

रोनाल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट: डील रोकने की तैयारी

रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनका प्रस्तावित बिल रूस से तेल की सभी प्रकार की खरीद को रोकने के लिए होगा। इस बिल का नाम रोनाल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट रखा जाएगा। फिट्जपैट्रिक ने दावा किया है कि इस बिल को एक विशेष विधायी प्रक्रिया के माध्यम से सीधे प्रतिनिधि सभा में वोटिंग के लिए लाया जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि इस बिल को संसद में भारी समर्थन मिलेगा क्योंकि यह रूस पर दबाव बनाए रखने की अमेरिकी नीति के अनुकूल है। इस बिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी सरकार किसी भी स्थिति में रूसी ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर न हो।

संसद में बिल की राह और राजनीतिक समीकरण

इस बिल को रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन का भी समर्थन प्राप्त है, जो इसके सह-प्रस्तावक बनेंगे। हालांकि, डॉन बेकन 3 नवंबर को होने वाले चुनाव में दोबारा नहीं लड़ रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिल के कानून बनने की संभावना काफी कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का वर्तमान कार्यकाल जनवरी में समाप्त होने वाला है। इतने कम समय में किसी बड़े बिल को पारित कराना और उसे लागू करना एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद, यह बिल ट्रंप की नीतियों के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का एक बड़ा संकेत है।

भारत और चीन पर प्रतिबंधों का संदर्भ

इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और चीन से भी जुड़ा है। अमेरिकी संसद ने 16 सितंबर को सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट पारित किया था, जिसे ट्रंप ने 18 सितंबर को कानून के रूप में मंजूरी दी थी। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इन देशों में भारत और चीन प्रमुखता से शामिल हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने ट्रंप की इस डील को शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ मिलकर यह कानून तैयार किया था। ब्लूमेंथल ने पहले भी भारत और चीन को रूसी तेल खरीदना बंद करने की कड़ी चेतावनी दी थी, और अब वह ट्रंप के इस कदम को विरोधाभासी मान रहे हैं।

अमेरिकी सांसदों के कड़े बयान

विभिन्न अमेरिकी सांसदों ने इस डील पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन ने याद दिलाया कि अमेरिका ने 2022 में ही रूसी ऊर्जा की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उनका कहना है कि ट्रंप संसद की सलाह और कानूनी जांच के बिना इस तरह की डीजल खरीद नहीं कर सकते। वहीं, डेमोक्रेटिक सांसद डेव मिन ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के समझौते जारी रहे, तो अमेरिका को खुद अपने ही बनाए कानूनों के तहत खुद पर प्रतिबंध लगाने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। रिपब्लिकन सांसद माइकल मैककॉल ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि डीजल की कीमतों को कम करना आवश्यक है, लेकिन रूस से खरीदारी करने का मतलब है कि पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए धन उपलब्ध कराना। सांसदों का मानना है कि यह सौदा रूस के खिलाफ वैश्विक प्रतिबंधों की मुहिम को कमजोर कर सकता है।