वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थितियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर मध्यस्थता की पेशकश की। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि वे वर्तमान वार्ता की प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तानी नेतृत्व की सराहना करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बताया है।
पाक-अफगान संघर्ष और ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर अपना रुख स्पष्ट किया है और आधिकारिक बयानों के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि वे इस संघर्ष में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पाकिस्तान के साथ उनके संबंध अत्यंत सकारात्मक स्तर पर हैं। ट्रंप के अनुसार, क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका अपनी भूमिका निभाने को तैयार है, बशर्ते दोनों पक्ष इसके लिए सहमत हों। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा और सीमा पार आतंकवाद को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है, जिस पर ट्रंप ने अब सीधी टिप्पणी की है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की प्रशंसा
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की कार्यशैली की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के पास एक महान प्रधानमंत्री और एक महान जनरल हैं, जिनका वे व्यक्तिगत रूप से बहुत सम्मान करते हैं। उनके अनुसार, वर्तमान नेतृत्व के तहत पाकिस्तान बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अपनी आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तलाश में है। ट्रंप ने इन नेताओं को 'महान नेता' बताते हुए द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं को बल दिया है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर असंतोष और चेतावनी
ईरान के संदर्भ में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे तेहरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जिस तरह से बातचीत की मेज पर व्यवहार कर रहा है, वह स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे वार्ताकारों को एक व्यापक समझौते पर पहुंचने के लिए कुछ और समय देंगे, लेकिन उनकी प्राथमिकता परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक ठोस और व्यापक समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सैन्य कार्रवाई का जोखिम और क्षेत्रीय सुरक्षा
व्हाइट हाउस में जब ट्रंप से ईरान पर संभावित हमले और उसके परिणामों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने युद्ध के जोखिमों को स्वीकार किया और उन्होंने कहा कि किसी भी सैन्य संघर्ष में हमेशा जोखिम बने रहते हैं और युद्ध के अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम होते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मध्य पूर्व में एक और बड़े युद्ध को टालना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन सुरक्षा हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं की बढ़ती तैनाती के बीच ट्रंप का यह बयान ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने बार-बार चुनौती दी है।
ऐतिहासिक संदर्भ और आतंकवाद पर ट्रंप का रुख
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल के निर्णयों का उल्लेख करते हुए ईरान को 'आतंकवाद का नंबर 1 प्रायोजक' करार दिया। उन्होंने कासिम सुलेमानी के खिलाफ की गई कार्रवाई को याद करते हुए कहा कि उसका खात्मा एक बड़ा कदम था। ट्रंप ने ईरान को 'रोडसाइड बमों का राजा' बताते हुए कहा कि उनके प्रशासन ने हमेशा ईरान की आक्रामक नीतियों का विरोध किया है। उन्होंने दोहराया कि ईरान की वर्तमान गतिविधियों पर उनकी कड़ी नजर है और वे भविष्य की कार्रवाई के लिए सभी विकल्पों को खुला रख रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका की प्राथमिकता वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के स्रोतों को समाप्त करना है।
