अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को देश की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य 'एक्सक्विजिट क्लास' (उत्तम श्रेणी) के हथियारों के उत्पादन को वर्तमान स्तर से चार गुना तक बढ़ाना है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ने उत्पादन की गति और समय-सीमा को लेकर अपनी सहमति दे दी है। यह रणनीतिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के विरुद्ध 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत व्यापक सैन्य कार्रवाई कर रही हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, हथियारों के उत्पादन में वृद्धि की प्रक्रिया इस बैठक से लगभग तीन महीने पहले ही शुरू कर दी गई थी और उन्होंने स्पष्ट किया कि कई नए हथियारों के संयंत्र और उत्पादन इकाइयां पहले से ही सक्रिय हैं। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि अमेरिका के पास वर्तमान में मीडियम और अपर मीडियम ग्रेड के गोला-बारूद की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है, जिसका उपयोग वर्तमान में ईरान और हाल ही में वेनेजुएला में सैन्य अभियानों के दौरान किया गया है। सरकार ने इन श्रेणियों के हथियारों के लिए नए ऑर्डर भी जारी कर दिए हैं ताकि भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
'एक्सक्विजिट क्लास' हथियारों की श्रेणी और उत्पादन लक्ष्य
राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा क्षेत्र के दिग्गजों के बीच हुई इस बैठक में 'एक्सक्विजिट क्लास' के हथियारों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया और यह श्रेणी उन उन्नत और सटीक हथियारों को संदर्भित करती है जो आधुनिक युद्धक्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ट्रंप ने बताया कि बीएई सिस्टम्स, बोइंग, हनीवेल एयरोस्पेस, एल3हैरिस मिसाइल सॉल्यूशंस, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और रेथियॉन ग्रुप जैसी कंपनियों के प्रमुखों ने उत्पादन क्षमता को चार गुना करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इस वृद्धि का उद्देश्य न केवल वर्तमान भंडार को भरना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता को बनाए रखना भी है और बैठक में यह भी तय किया गया कि अगले दो महीनों के भीतर प्रगति की समीक्षा के लिए पुनः बैठक आयोजित की जाएगी।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की प्रगति और व्हाइट हाउस का रुख
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने मीडिया को संबोधित करते हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी। लेविट के अनुसार, इस सैन्य अभियान का मुख्य लक्ष्य अगले 4-6 हफ्तों के भीतर हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अमेरिका के पास इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद और सैन्य स्टॉक मौजूद है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और 'रोरिंग लायन' के तहत अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर समन्वित हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को पंगु बनाना है।
अमेरिकी सैनिकों का बलिदान और पेंटागन की प्रतिक्रिया
इस सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका को अपने छह सैनिकों को खोना पड़ा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में शहीद हुए इन सैनिकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया। हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में मेजर जेफरी आर और ओ'ब्रायन, कैप्टन कोडी ए. खोर्क, चीफ वॉरेंट ऑफिसर 3 रॉबर्ट एम. मार्ज़ान, सर्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल एम. अमोर, सर्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ एल. टीटजेंस और सर्जेंट डेक्लन जे. कोडी के नाम का उल्लेख करते हुए उन्हें राष्ट्र का नायक बताया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और इन मौतों के लिए जिम्मेदार तत्वों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ईरान के रक्षा तंत्र को हुए नुकसान का आधिकारिक विवरण
इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने ईरान में हुई क्षति का एक विस्तृत आकलन जारी किया है। IDF के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी के अनुसार, संयुक्त हमलों में ईरान के लगभग 60% मिसाइल लॉन्चर और मिसाइलों के एक बड़े भंडार को नष्ट कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, यह दावा किया गया है कि ईरान के लगभग 80% एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) अब निष्क्रिय हो चुके हैं। शोशानी ने बताया कि इन प्रणालियों के नष्ट होने से ईरानी हवाई क्षेत्र पर अब गठबंधन सेनाओं का प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो गया है। इन हमलों ने ईरानी शासन की लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
रक्षा उद्योग के दिग्गजों के साथ रणनीतिक समन्वय
हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अमेरिका के विभिन्न राज्यों के बीच भी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है और राष्ट्रपति ट्रंप ने जानकारी दी कि कई राज्य अपने यहां नए रक्षा संयंत्र स्थापित करने के लिए बोलियां लगा रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। रक्षा कंपनियों के साथ हुए इस समझौते को अमेरिकी रक्षा नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 28 फरवरी को हुए संयुक्त सैन्य हमले के बाद से, जिसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था, क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अमेरिकी प्रशासन का वर्तमान ध्यान अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और सहयोगियों के साथ मिलकर सैन्य दबाव बनाए रखने पर केंद्रित है।
