संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक ऐसी चेतावनी दी है जिसने पूरी दुनिया के राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर सदस्य देशों ने अपना बकाया नहीं चुकाया, तो संयुक्त राष्ट्र (UN) जल्द ही कंगाली की कगार पर खड़ा होगा। यह संकट इतना गहरा है कि जुलाई तक संगठन का संचालन बजट पूरी तरह समाप्त हो सकता है और गुटेरेस ने सभी 193 सदस्य देशों को पत्र लिखकर इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया है और तत्काल वित्तीय सुधारों की मांग की है।
ट्रंप प्रशासन और अमेरिका का भारी बकाया
इस वित्तीय संकट के केंद्र में संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा दानकर्ता, अमेरिका है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने पिछले साल से अपने बकाये का भुगतान करने में भारी कोताही बरती है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका पर सामान्य बजट का लगभग 2. 196 अरब डॉलर बकाया है। इसके अलावा, इस साल के लिए 767 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि भी देय होगी। गुटेरेस ने अपने पत्र में किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों का इशारा साफ तौर पर वाशिंगटन की ओर था। अमेरिका के इस रुख ने दुनिया की सबसे बड़ी संस्था के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगा दिया है।
शांति अभियानों पर मंडराता खतरा
केवल सामान्य बजट ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा अभियानों (Peacekeeping Missions) का बजट भी भारी घाटे में चल रहा है। अमेरिका पर शांति रक्षा अभियानों के लिए 1 और 8 अरब डॉलर का बकाया है। यह वह पैसा है जिसका उपयोग दुनिया के अशांत क्षेत्रों में। शांति बनाए रखने और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए किया जाता है। यदि यह राशि प्राप्त नहीं होती है, तो अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में चल रहे महत्वपूर्ण मिशन बंद हो सकते हैं, जिससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है।
वेनेजुएला की हालत और वोटिंग अधिकार
बकाया न चुकाने वाले देशों की सूची में अमेरिका के बाद वेनेजुएला का नाम आता है। वेनेजुएला पर 38 मिलियन डॉलर का बकाया है। आर्थिक संकट और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहे इस देश ने पिछले दो वर्षों से भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण उसने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना मतदान अधिकार (Voting Rights) भी खो दिया है। गुटेरेस ने बताया कि 2025 के अंत तक कुल बकाया राशि रिकॉर्ड 1. 568 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी है।
वित्तीय नियमों में बदलाव की मांग
महासचिव गुटेरेस ने सदस्य देशों से अपील की है कि वे संगठन के पुराने पड़ चुके वित्तीय नियमों में बदलाव करें। वर्तमान नियमों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र को वह पैसा भी सदस्य देशों को वापस करना पड़ता है जो कभी प्राप्त ही नहीं हुआ, लेकिन बजट में आवंटित था। गुटेरेस चाहते हैं कि इस 'लिक्विडिटी क्राइसिस' को रोकने के लिए इन नियमों को लचीला बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दिसंबर तक भुगतान में सुधार नहीं हुआ, तो 2026 के लिए मंजूर 3. 45 अरब डॉलर का बजट भी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
