मध्य पूर्व में सैन्य तनाव के एक बड़े विस्तार के रूप में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान पर हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल हमले का सीधा जवाब है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स से उभर रही खबरों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने गुरुवार, 30 जुलाई की सुबह इन हमलों की शुरुआत की। यह ऑपरेशन दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष में एक निर्णायक मोड़ का प्रतीक है, जो जॉर्डन में हुई घटना के बाद शुरू हुआ है।
सेंटकॉम ने की जवाबी हमलों की पुष्टि
अमेरिकी सेंट्रल कमांड, जिसे आमतौर पर सेंटकॉम (CENTCOM) के नाम से जाना जाता है, ने इन हवाई ऑपरेशनों के निष्पादन की आधिकारिक पुष्टि की है और एक औपचारिक बयान में, सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि ये हमले विशेष रूप से जॉर्डन में अमेरिकी कर्मियों और सुविधाओं के खिलाफ दिखाई गई आक्रामकता के प्रतिशोध के रूप में किए गए थे। सैन्य कमान ने इस बात पर जोर दिया कि लक्ष्यों का चयन उन ठिकानों की भागीदारी या समर्थन के आधार पर किया गया था, जिन्होंने पहले अमेरिकी बेस को निशाना बनाने वाले मिसाइल हमलों में भूमिका निभाई थी। यह पुष्टि क्षेत्र में अपनी संपत्ति की रक्षा करने और अपनी सैन्य उपस्थिति के खिलाफ सीधे खतरों का जवाब देने के लिए पेंटागन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
हवाई हमलों की शुरुआत से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दे दिया था कि एक मजबूत प्रतिक्रिया आसन्न है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान, राष्ट्रपति ने ईरान के संबंध में एक सख्त रुख अपनाया। उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि अब हमारी बारी है। यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत था कि जॉर्डन की घटना के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका अब रक्षात्मक मुद्रा में नहीं रहेगा। ट्रंप ने नियोजित प्रतिक्रिया की प्रकृति के बारे में और विस्तार से बताते हुए कहा कि अमेरिका उन पर बहुत जोर से हमला करने जा रहा है और ईरानी नेतृत्व को अच्छी तरह पता था कि ऐसा कदम उठाया जाने वाला है।
चेतावनियों के अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी पक्ष से संचार के संबंध में एक उल्लेखनीय दावा किया। उन्होंने सुझाव दिया कि ईरान ने अपने मिसाइल लॉन्च के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका से संपर्क किया था। ट्रंप के अनुसार, ईरानी सरकार ने स्वीकार किया कि जॉर्डन बेस पर मिसाइल हमला एक गलती थी। इसके अलावा, राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका से जवाबी हमला न करने का अनुरोध किया था। तेहरान की ओर से तनाव कम करने के इन कथित अनुरोधों के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन ने एक स्पष्ट निवारक स्थापित करने के लिए सैन्य अभियान को आगे बढ़ाया।
पांच दिन के विराम के बाद सैन्य कार्रवाई की बहाली
30 जुलाई को किए गए हवाई हमले एक संक्षिप्त अंतराल के बाद शत्रुता की बहाली का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि अमेरिकी सेना ने पहले लगातार 13 दिनों की अवधि के लिए ईरानी ठिकानों के खिलाफ हमलों का एक निरंतर अभियान चलाया था। इस लगभग दो सप्ताह लंबे ऑपरेशन के बाद, सैन्य गतिविधि में एक विराम आया जो 5 दिनों तक चला। हालांकि, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमले ने एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य किया, जिससे अमेरिका को विराम समाप्त करने और नई तीव्रता के साथ अपने हवाई अभियान को फिर से शुरू करने के लिए प्रेरित होना पड़ा। जुड़ाव का यह पैटर्न वर्तमान सुरक्षा वातावरण की अस्थिर प्रकृति को उजागर करता है।
ईरान के कई हिस्सों में धमाकों की खबरें
अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद, ईरान के सरकारी मीडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई विस्फोटों की रिपोर्ट करना शुरू कर दिया और सरकारी प्रसारक, आईआरआईबी (IRIB) ने पुष्टि की कि बुशहर प्रांत में भारी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। यह विशेष स्थान उच्च रणनीतिक महत्व का है क्योंकि यहाँ ईरान का एकमात्र परिचालन परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है। हालांकि रिपोर्टों ने आसपास के क्षेत्र में विस्फोटों की पुष्टि की, लेकिन परमाणु सुविधा पर विशिष्ट प्रभाव के बारे में सरकारी मीडिया द्वारा तुरंत विस्तार से नहीं बताया गया।
ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों से सैन्य गतिविधि की और खबरें आईं। तस्नीम समाचार एजेंसी ने केशम द्वीप के संबंध में विशिष्ट विवरण प्रदान किए, जहां कम से कम 3 विस्फोट दर्ज किए गए। द्वीप पर स्थानीय निवासियों के वृत्तांतों के अनुसार, कम से कम एक मिसाइल कथित तौर पर एक आवासीय क्षेत्र में गिरी। हालांकि भौतिक प्रभाव देखा गया था, लेकिन रिपोर्ट के समय हताहतों की संख्या या नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की सीमा की तत्काल पुष्टि नहीं हुई थी। प्रेस टीवी ने भी इन वृत्तांतों की पुष्टि करते हुए कहा कि देश भर में कई स्थान अमेरिकी हमलों के प्रभाव का अनुभव कर रहे थे।
रणनीतिक केंद्रों और द्वीपों को बनाया निशाना
अमेरिकी हवाई हमलों का दायरा व्यापक दिखाई दिया, जिसमें कई प्रमुख औद्योगिक और समुद्री केंद्रों को निशाना बनाया गया और आईआरआईबी ने एक उप सुरक्षा मंत्री के हवाले से बताया कि खुज़ेस्तान प्रांत में स्थित अबादान में विशिष्ट ठिकानों को अमेरिकी सेना ने सफलतापूर्वक निशाना बनाया। अबादान अपनी महत्वपूर्ण तेल शोधन क्षमताओं के लिए जाना जाता है, जो इसे एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक स्थल बनाता है। इसके अतिरिक्त, हमले होर्मोजगन प्रांत तक फैल गए, जिसमें एक प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में विस्फोटों की खबरें मिलीं।
सैन्य अभियान फारस की खाड़ी के कई द्वीपों पर भी केंद्रित था और रिपोर्टों ने संकेत दिया कि अबू मूसा, किश और केशम द्वीप सभी हवाई बमबारी के अधीन थे। ये द्वीप महत्वपूर्ण शिपिंग लेन के पास स्थित होने के कारण महत्वपूर्ण सामरिक मूल्य रखते हैं। व्यापक हमलों की खबरों के बीच, ईरानी अधिकारियों ने अन्य क्षेत्रों में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कदम उठाए। विशेष रूप से, उन्होंने उल्लेख किया कि सिरिक शहर में किसी भी हमले या विस्फोट की कोई खबर नहीं थी, जिससे पता चलता है कि अमेरिकी सेना के पास लक्ष्यों की एक विशिष्ट सूची थी और उसने सभी तटीय शहरों में अंधाधुंध बमबारी नहीं की।
