CWG 2026: गणित के ग्रेजुएट मुरली श्रीशंकर ने लंबी कूद में जीता सिल्वर, माता-पिता की विरासत को बढ़ाया आगे

भारतीय एथलीट मुरली श्रीशंकर ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। गणित में स्नातक श्रीशंकर ने 8 दशमलव 09 मीटर की छलांग लगाकर लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।

भारतीय एथलेटिक्स के क्षेत्र में एक बार फिर गर्व का क्षण आया है जब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुरली श्रीशंकर ने अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक पर कब्जा किया। 27 साल के इस एथलीट ने एक बार फिर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है और यह साबित कर दिया है कि उनकी सफलता के पीछे कड़ी मेहनत और उनके परिवार की एथलेटिक्स विरासत का बड़ा हाथ है। मुरली श्रीशंकर ने एथलेटिक्स के मेंस लॉन्ग जंप इवेंट में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में मिली अपनी पिछली कामयाबी को बरकरार रखा है। ग्लासगो में उन्होंने अपनी छलांग से 8 दशमलव 09 मीटर की दूरी नापी, जो उन्हें पोडियम पर दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए पर्याप्त रही।

गणित के सवालों से लेकर मैदान की दूरी तक

मुरली श्रीशंकर की पहचान केवल एक एथलीट के रूप में ही नहीं है, बल्कि वह शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी आगे हैं और एससी की डिग्री हासिल की है। गणित के कठिन सवालों को हल करने वाले श्रीशंकर ने मैदान पर भी उसी सटीकता के साथ अपनी छलांग लगाई। उनके लिए गणित और एथलेटिक्स का तालमेल काफी गहरा रहा है। जिस तरह वह गणित के समीकरणों को सुलझाते हैं, उसी तरह उन्होंने अपनी छलांग की दूरी को भी बखूबी नापा। उनकी यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है और उनके खेल में अनुशासन और विश्लेषण की क्षमता को दर्शाती है।

विरासत में मिली चांदी की चमक

मुरली श्रीशंकर के लिए एथलेटिक्स कोई नया विषय नहीं है, बल्कि यह उनके खून में ही शामिल है। 27 मार्च 1999 को जन्मे इस खिलाड़ी को खेल की दुनिया विरासत में मिली है। उनके माता-पिता भी भारत के लिए स्टार एथलीट रह चुके हैं और उन्होंने भी देश के लिए चांदी के पदक जीते हैं। श्रीशंकर के पिता एस. मुरली भारत के पूर्व ट्रिपल जंपर थे और उन्होंने साउथ एशियन गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था। वहीं उनकी मां केएस बिजीमोल 800 मीटर की धाविका रह चुकी हैं। उन्होंने भी 1992 के एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। अब उनके बेटे ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार दूसरी बार सिल्वर जीतकर इस पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाया है।

शुरुआती संघर्ष और ऐतिहासिक करियर

एथलेटिक्स में मुरली श्रीशंकर के करियर की शुरुआत 50 मीटर और 100 मीटर की दौड़ से हुई थी। इन स्पर्धाओं में वह स्टेट लेवल पर अंडर 10 चैंपियन भी रहे थे। लेकिन उनके जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब वह 13 साल के थे। अपने पिता की देखरेख और मार्गदर्शन में उन्होंने लॉन्ग जंप यानी लंबी कूद की दुनिया में कदम रखा। यही फैसला उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। वह वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करने वाले देश के पहले लॉन्ग जंपर बने और अब कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में दो सिल्वर मेडल जीतने वाले वह भारत के पहले लॉन्ग जंपर बन गए हैं, जो भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।