पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और सामाजिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। विधानसभा चुनाव और आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। इस अशांत माहौल के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आंदोलनकारियों को लेकर एक अत्यंत विवादित और सख्त बयान दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। रक्षा मंत्री ने न केवल प्रदर्शनकारियों को बातचीत के अयोग्य बताया है, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर भारत से जोड़कर देश का दुश्मन करार दिया है।
ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान और भारत पर आरोप
पत्रकारों से बातचीत के दौरान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने PoK में प्रदर्शन कर रहे लोगों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत नहीं होगी। आसिफ ने आगे कहा कि वह इन प्रदर्शनकारियों को भारत की श्रेणी में रखते हैं और उन्हें भारत की तरह ही पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं। उनके इस बयान को स्थानीय लोगों की जायज मांगों को दबाने और उन्हें विदेशी साजिश का हिस्सा बताने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की और 38 मांगें उनके सामने रखीं। सनाउल्लाह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण नहीं हैं और वे बलपूर्वक मुजफ्फराबाद और मीरपुर पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने इन प्रदर्शनों की तुलना भारत द्वारा किए जाने वाले हमलों से की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान इस आंतरिक विद्रोह को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के रूप में पेश कर रहा है।
हिंसा और मौतों के आंकड़ों पर विरोधाभास
PoK में जारी झड़पों में जान-माल का भारी नुकसान होने की खबरें आ रही हैं। JAAC ने बुधवार को दावा किया कि सोमवार से अब तक सुरक्षा बलों के साथ हुई हिंसा में उसके कम से कम 20 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। JAAC की कोर समिति के सदस्य आबिद शाहीन ने बताया कि सोमवार को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक निकाले गए मार्च के दौरान लगभग एक दर्जन कार्यकर्ताओं की जान गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए।
समिति के एक अन्य सदस्य इम्तियाज असलम ने जानकारी दी कि मारे गए लोगों में JAAC के संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं और हालांकि, कुछ अन्य रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनों में अब तक कुल 37 लोगों की मौत हो चुकी है। JAAC का कहना है कि उनके कार्यकर्ता निहत्थे थे और उनके पास केवल लाठियां थीं, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन पर बर्बरतापूर्वक कार्रवाई की।
पुलिस का पक्ष और आंदोलन का इतिहास
JAAC के आरोपों को PoK पुलिस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है और पुलिस प्रमुख कैप्टन (सेवानिवृत्त) लियाकत अली मलिक ने कहा कि प्रदर्शनकारी निहत्थे नहीं थे, बल्कि उनके पास आधुनिक हथियार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने ही पहले सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू की थी। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों द्वारा बताए जा रहे मौत के आंकड़ों पर भी संदेह जताया है। क्षेत्र में संचार माध्यमों पर पाबंदी के कारण इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना कठिन हो गया है।
यह आंदोलन जून के महीने से ही सुलग रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सोमवार की हिंसा से पहले तक इस पूरे आंदोलन में 40 लोगों की मौत हो चुकी थी। इस संख्या में 34 प्रदर्शनकारी और 6 पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान शामिल थे। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि क्षेत्र में असंतोष की जड़ें कितनी गहरी हैं और प्रशासन इसे नियंत्रित करने में विफल रहा है।
चुनाव और 12 विवादित सीटों का पूरा मामला
PoK में चल रहे इस पूरे विवाद की जड़ में वहां की तथाकथित क्षेत्रीय विधानसभा की 12 विवादित सीटें हैं। JAAC पिछले एक महीने से इन सीटों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान इन 12 सीटों का उपयोग अपनी पसंद का प्रधानमंत्री चुनने के लिए एक उपकरण के रूप में करता है, जिससे स्थानीय जनादेश का अपमान होता है।
PoK की तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधा चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं। सोमवार को पहले चरण के तहत 13 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने 9 सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि, इस चुनाव प्रक्रिया पर धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं और केंद्र में PML-N की सहयोगी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने भी चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI ने इन चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार किया है। शेष 32 सीटों के लिए दूसरे और तीसरे चरण का मतदान 2 अगस्त और 10 अगस्त को होना तय है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और मीडिया कवरेज पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया और स्पष्ट रुख
भारत ने PoK में हो रहे इन तथाकथित चुनावों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि ये चुनाव पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे को छिपाने की एक नाकाम कोशिश मात्र हैं। भारत ने दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।
भारत का मानना है कि PoK में जारी व्यापक जन-आक्रोश पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण, लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने के लिए भारत का नाम घसीट रहा है।
