कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: दिलीप गावित ने रचा इतिहास, 100 मीटर टी47 स्पर्धा में जीता गोल्ड मेडल

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सातवें दिन दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। मोहम्मद बासिल ने इसी स्पर्धा में रजत पदक जीता।

स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सातवां दिन भारतीय खेल इतिहास के लिए एक स्वर्णिम अध्याय बनकर उभरा है। इस दिन पैरा एथलेटिक्स की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराया। विशेष रूप से पुरुषों की 100 मीटर टी47 फाइनल स्पर्धा में भारत को दोहरी सफलता मिली, जहां दिलीप महादु गावित ने स्वर्ण पदक पर कब्जा किया और मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। इन दो पदकों के साथ भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है और खिलाड़ियों के उत्साह में भारी वृद्धि देखी गई है।

दिलीप गावित और मोहम्मद बासिल का शानदार प्रदर्शन

ग्लासगो के ट्रैक पर जब 100 मीटर टी47 स्पर्धा की शुरुआत हुई, तो सभी की निगाहें भारतीय धावकों पर टिकी थीं। 71 सेकंड के समय के साथ दौड़ पूरी की। यह उनके सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। दिलीप की इस जीत ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय पुरुष एथलीट बना दिया है। 83 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक अपने नाम किया। एक ही स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों पदकों पर भारतीय कब्जा होना भारतीय पैरा एथलेटिक्स के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। इस सफलता के साथ भारत के खाते में अब कुल तीन गोल्ड मेडल जुड़ गए हैं और पदकों की कुल संख्या 15 हो गई है।

दिलीप गावित: संघर्ष से सफलता तक की कहानी

दिलीप गावित की यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके कड़े संघर्ष और अटूट इच्छाशक्ति का परिणाम है। दिलीप महाराष्ट्र के नासिक जिले के पास स्थित तोरण डोंगरी गांव के रहने वाले हैं और वह एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया। बचपन में दिलीप के साथ एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जब वह एक पेड़ से गिर गए थे। इस हादसे में उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई थी। उचित और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण संक्रमण फैल गया और डॉक्टरों को उनका हाथ कोहनी के नीचे से काटना पड़ा। इस शारीरिक अक्षमता के बावजूद दिलीप ने हार नहीं मानी और एथलेटिक्स को अपना करियर बनाया। इससे पहले उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2022 में पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबिलियत साबित की थी।

ऐतिहासिक उपलब्धि और भविष्य के लक्ष्य

दिलीप गावित अब कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पैरा एथलीट बन गए हैं और उनसे पहले महिला शॉट पुट एफ57 इवेंट में शर्मिला ने यह गौरव हासिल किया था। अपनी जीत के बाद दिलीप ने बताया कि दौड़ की शुरुआत में वह थोड़े धीमे थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी गति बढ़ाई और अंततः जीत हासिल की। उन्होंने ग्लासगो के मौसम को एक बड़ी चुनौती बताया। दिलीप के अनुसार, खराब मौसम और ठंड के कारण शरीर सुस्त हो जाता है और वार्मअप करने में काफी कठिनाई होती है, जिससे सही टाइमिंग हासिल करना मुश्किल हो जाता है। अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बात करते हुए दिलीप ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान केवल पदकों पर है और वह नौकरी के बारे में नहीं सोच रहे हैं। उनका अगला बड़ा लक्ष्य सितंबर-अक्टूबर में जापान में होने वाले पैरा एशियाई खेल और उसके बाद पैरालंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।