पिछले महीने ईरान में एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने एक नया मोड़ ले लिया है। एक हालिया रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि यह विमान चीन में बनी एक मिसाइल का शिकार हुआ हो सकता है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इसमें चीन द्वारा ईरान को रडार, एयर डिफेंस और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य सहायता प्रदान करने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस पूरे मामले की जांच अभी भी जारी है और अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दक्षिण-पश्चिमी ईरान में हुआ हादसा और चीनी कनेक्शन
यह घटना दक्षिण-पश्चिमी ईरान में पिछले महीने घटित हुई थी, जब अमेरिकी वायुसेना का एक F-15 लड़ाकू विमान क्रैश हो गया था। NBC न्यूज की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि विमान को चीन में निर्मित कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के जरिए निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि चीन ने युद्ध के दौरान ईरान को अन्य कई प्रकार की सैन्य मदद भी मुहैया कराई हो सकती है। इसमें विशेष रूप से स्टेल्थ विमान तकनीक और लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले रडार सिस्टम का उल्लेख किया गया है।
आधुनिक ट्रैकिंग और सैन्य उपकरणों का उपयोग
अमेरिकी अधिकारियों का ऐसा मानना है कि चीन द्वारा मुहैया कराए गए इन उपकरणों की मदद से ईरान आधुनिक अमेरिकी लड़ाकू विमानों की निगरानी बेहतर तरीके से कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सिस्टम्स की मदद से ईरान विशेष रूप से F-15E स्ट्राइक ईगल जैसे विमानों को ट्रैक करने में सक्षम हो सकता है। युद्ध की स्थिति के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बात का जिक्र किया था कि विमान को कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाया गया था और इस तरह की मिसाइलों को तकनीकी भाषा में MANPADS कहा जाता है। ये छोटे और पोर्टेबल हथियार होते हैं जिन्हें एक व्यक्ति आसानी से अपने कंधे पर रखकर चला सकता है। इनकी लंबाई लगभग 7 फीट और वजन करीब 40 पाउंड होता है। इनका मुख्य उपयोग कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को गिराने के लिए किया जाता है।
36 घंटे तक चला गहन सर्च ऑपरेशन
विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने दोनों क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकालने के लिए 36 घंटे तक एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। इस F-15 विमान में 2 लोग सवार थे। हादसे के समय दोनों ने सूझबूझ दिखाते हुए पैराशूट के जरिए विमान से सुरक्षित छलांग लगा दी थी। पायलट को हादसे के लगभग 7 घंटे के भीतर ही सुरक्षित बचा लिया गया था। हालांकि, दूसरे क्रू सदस्य, जो हथियार प्रणाली अधिकारी के रूप में तैनात थे, उन्हें खोजने में काफी समय लगा। पायलट को ईरान के जाग्रोस पर्वत क्षेत्र में छिपकर समय बिताना पड़ा और लगभग 2 दिन के बाद उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला जा सका। अमेरिकी अधिकारी अभी भी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि विमान को गिराने के लिए वास्तव में किस हथियार का प्रयोग किया गया था।
अमेरिका और चीन के रिश्तों पर प्रभाव
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि चीन ने ये सैन्य उपकरण ईरान को कब दिए थे। लेकिन यदि यह साबित हो जाता है कि ईरान वास्तव में चीनी हथियारों का उपयोग कर रहा है, तो इससे अमेरिका और चीन के बीच पहले से मौजूद तनाव और अधिक बढ़ सकता है और अमेरिका इसे ईरान को चीन की ओर से दी जाने वाली परोक्ष मदद के रूप में देख सकता है। यह मामला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन चीन के सहयोग से अमेरिका-ईरान संघर्ष को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि राष्ट्रपति जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा है। ट्रंप ने उस समय जिनपिंग के इस वादे पर भरोसा जताया था और इसकी सराहना भी की थी।
