वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष एक नए और अधिक गंभीर चरण में प्रवेश करता दिख रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन, अब ईरान के खिलाफ हफ्तों तक चलने वाले जमीनी सैन्य अभियानों के विकल्पों पर विचार कर रहा है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब एक महीने से जारी हवाई और मिसाइल हमलों के बावजूद अमेरिका अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पूरी तरह प्राप्त करने में सफल नहीं रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इन संभावित अभियानों में हजारों अमेरिकी सैनिकों को ईरानी क्षेत्र में उतारा जा सकता है, जो इस क्षेत्रीय संघर्ष के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकता है।
सैन्य अभियानों की रूपरेखा और सैनिकों की संख्या
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पेंटागन द्वारा तैयार किए जा रहे विकल्पों में 17,000 से अधिक सैनिकों की तैनाती शामिल हो सकती है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये ऑपरेशन पूर्ण पैमाने पर आक्रमण (Full-scale invasion) से कुछ कम होंगे, लेकिन इनकी प्रकृति अत्यंत आक्रामक होगी। इन अभियानों में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज और नियमित इन्फैंट्री का एक मिश्रित दस्ता शामिल करने की योजना है और अधिकारियों के अनुसार, इन सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान के भीतर विशिष्ट लक्ष्यों को निशाना बनाना और सामरिक महत्व के क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करना है। यह योजना हफ्तों या महीनों तक चलने वाले निरंतर अभियानों पर आधारित है, जो केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य और तटीय क्षेत्रों पर ध्यान
प्रस्तावित जमीनी अभियानों का एक मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित तटीय इलाके और द्वीप हो सकते हैं। अमेरिकी सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि तेहरान द्वारा नियंत्रित रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करना और उन्हें लंबे समय तक अपने नियंत्रण में रखना ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए आवश्यक है। इन क्षेत्रों में विस्तारित छापेमारी (Extended Raids) की योजना बनाई गई है ताकि ईरान की नौसैनिक गतिविधियों और तेल आपूर्ति मार्गों पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन क्षेत्रों पर कब्जा बनाए रखने से अमेरिकी सैनिकों के लिए जोखिम काफी बढ़ जाएगा, क्योंकि वे ईरानी जवाबी हमलों के सीधे दायरे में होंगे।
व्हाइट हाउस और पेंटागन की आधिकारिक स्थिति
इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इनमें से किसी भी जमीनी योजना को औपचारिक मंजूरी नहीं दी है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं के अनुसार, पेंटागन का प्राथमिक कार्य राष्ट्रपति को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए 'अधिकतम विकल्प' (Maximum Options) उपलब्ध कराना है और इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी सैन्य कार्रवाई पर अंतिम निर्णय ले लिया गया है। वर्तमान में, अमेरिकी प्रशासन कूटनीतिक और सैन्य दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है और पेंटागन के भीतर इन विकल्पों पर चर्चा जारी है, जिसमें ऑपरेशन की अवधि और संभावित जनहानि के आकलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की जवाबी चेतावनी
अमेरिका की इन तैयारियों के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ा रुख अपनाया है। IRGC ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी संस्थानों और सैन्य ठिकानों को सीधी चेतावनी जारी की है। 0 किलोमीटर दूर रहने के लिए कहा गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका जमीनी स्तर पर कोई भी आक्रामक कदम उठाता है, तो उसका जवाब क्षेत्रीय स्तर पर दिया जाएगा। हाल के दिनों में तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में हुए हमलों के बाद ईरान ने अपनी रक्षात्मक और आक्रामक मुद्रा को और अधिक सख्त कर दिया है।
युद्ध की वर्तमान स्थिति और हताहतों का विवरण
पिछले एक महीने से जारी इस संघर्ष में अब तक मानवीय और सैन्य नुकसान की खबरें लगातार आ रही हैं और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 300 से अधिक घायल हुए हैं। दूसरी ओर, ईरान के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से तेहरान के उत्तर-पूर्वी इलाकों में स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों पर भी हमले हुए हैं, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। पड़ोसी अरब देशों और इजरायल के साथ ईरान के बढ़ते तनाव ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि जमीनी ऑपरेशन शुरू होता है, तो हताहतों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है और यह संघर्ष एक लंबे क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है।
