Pakistan News / पाकिस्तान में कभी भी हो सकता है तख्तापलट, पद से हटाए जा सकते हैं राष्ट्रपति जरदारी

पाकिस्तान में तख्तापलट की आशंका फिर गहराने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। 47 साल पहले जुलाई में ही जिया उल हक ने तख्तापलट किया था। अब आसिम मुनीर को राष्ट्रपति बनाए जाने की अटकलें हैं, जबकि देश में विरोध शुरू हो गया है।

Pakistan News: पाकिस्तान से एक बार फिर सियासी उथल-पुथल की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय मीडिया के हवाले से दावा किया जा रहा है कि देश में जल्द ही तख्तापलट हो सकता है, और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को उनके पद से हटाया जा सकता है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब 5 जुलाई को पाकिस्तान में 47 साल पहले जनरल जिया उल हक ने तख्तापलट कर जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार को उखाड़ फेंका था। इस ऐतिहासिक घटना की बरसी के साथ ही पाकिस्तान में तख्तापलट का नया डर फिर से जाग उठा है।

आसिम मुनीर: तख्तापलट का नया चेहरा?

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, सेना प्रमुख और हाल ही में फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में राष्ट्रपति जरदारी को हटाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। वरिष्ठ पत्रकार सैयद के हवाले से यह दावा किया गया है कि मुनीर, जो पहले ही सेना और खुफिया एजेंसियों में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं, अब सत्ता की बागडोर पूरी तरह अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या आसिम मुनीर खुद राष्ट्रपति पद संभालने की योजना बना रहे हैं? या फिर यह सियासी जोड़तोड़ का हिस्सा है, जिसमें शरीफ खानदान भी शामिल हो सकता है?

पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में तख्तापलट कोई नई बात नहीं है। 1958, 1977, और 1999 में सेना ने सत्ता पर कब्जा किया था। ऐसे में, आसिम मुनीर की महत्वाकांक्षा और हाल के विवादास्पद कदम, जैसे पहलगाम हमले के बाद भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी, उनके इरादों पर सवाल उठाते हैं।

बिलावल भुट्टो के बयान ने मचाया तूफान

इस बीच, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी के एक बयान ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। अल जजीरा को दिए एक साक्षात्कार में बिलावल ने कहा कि यदि भारत मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों के ठिकाने के बारे में ठोस सबूत देता है, तो पाकिस्तान उन्हें गिरफ्तार करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मसूद अजहर शायद अफगानिस्तान में हो सकता है, न कि पाकिस्तान में। इस बयान ने पाकिस्तान में हंगामा खड़ा कर दिया, और हाफिज सईद के बेटे को सफाई देनी पड़ी।

बिलावल के इस बयान को आसिम मुनीर के खिलाफ एक अप्रत्यक्ष हमले के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मुनीर पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है। बिलावल की यह टिप्पणी न केवल सियासी हलकों में, बल्कि आम जनता में भी चर्चा का विषय बन गई है। कुछ लोग इसे जरदारी परिवार की ओर से सत्ता बचाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे पाकिस्तान की आंतरिक सियासत में बदलते समीकरणों का संकेत मान रहे हैं।

शहबाज शरीफ और सियासी गठजोड़

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की भूमिका भी इस संकट में अहम मानी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि शहबाज शरीफ की सरकार सेना के दबाव में काम कर रही है, और आसिम मुनीर के प्रमोशन को फील्ड मार्शल के पद पर मंजूरी देना इसी का नतीजा था। यह भी सवाल उठता है कि क्या शरीफ खानदान इस तख्तापलट की साजिश में शामिल है, या वे केवल परिस्थितियों के हिसाब से कदम उठा रहे हैं?

पाकिस्तान का भविष्य अधर में

पाकिस्तान में तख्तापलट की आशंका ने न केवल आंतरिक सियासत को हिलाकर रख दिया है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारत के साथ तनाव, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना की कमजोर स्थिति, और बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा ने देश को अस्थिरता की कगार पर ला खड़ा किया है।

जुलाई का महीना क्या पाकिस्तान को एक नया तानाशाह देगा, या फिर सड़कों पर विरोध और खूनखराबे की नई कहानी लिखी जाएगी? बिलावल भुट्टो और पीपीपी ने इस तख्तापलट के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है, लेकिन क्या वे सेना की ताकत के सामने टिक पाएंगे? कई लोग मानते हैं कि इस संकट से उबरने के लिए पाकिस्तानी नेताओं को अब भारत जैसे पड़ोसी देशों से सकारात्मक कूटनीति की उम्मीद है।

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