पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सोमवार 25 मई को ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते में हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए चीन पहुंच गए हैं। मुनीर यहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे और इस समझौते से जुड़े भविष्य के एक्शन प्लान पर चर्चा करेंगे। चीन इस पूरी डील में पर्दे के पीछे से एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और पूरी प्रक्रिया को संचालित कर रहा है और इस कूटनीतिक ढांचे में पाकिस्तान की भूमिका एक संदेशवाहक यानी मैसेंजर की है, जो दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का कार्य कर रहा है।
समझौते की पृष्ठभूमि और चीन का हस्तक्षेप
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान की अपनी यात्रा पूरी करने के तुरंत बाद मुनीर बीजिंग पहुंचे हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी उनके साथ मौजूद हैं। इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महीने के मध्य में चीन का दौरा किया था। उस समय ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता पूरी तरह से ठप हो चुकी थी। ट्रंप ने बीजिंग से इस मामले में हस्तक्षेप करने और मदद करने का अनुरोध किया, जिसके बाद चीन ने पाकिस्तान को इस प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने का निर्देश दिया।
ड्राफ्ट का आदान-प्रदान और मुनीर की तेहरान यात्रा
चीन के निर्देश के बाद सबसे पहले दोनों देशों के बीच समझौते के ड्राफ्ट का आदान-प्रदान किया गया। इस दौरान यह रणनीति बनाई गई कि पहले कुछ अंतरिम समझौते किए जाएंगे और उसके बाद ही अंतिम समझौते की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। जनरल मुनीर ने इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए स्वयं अमेरिका का संदेश लेकर तेहरान की यात्रा की और वहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन और ईरान के वार्ता दल के प्रमुख गालिबफ के साथ गहन चर्चा की। मुनीर द्वारा भेजे गए संदेश पर अमेरिका ने अपनी सहमति दे दी है और अब मुनीर इसी पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट शी जिनपिंग को सौंपने चीन पहुंचे हैं।
ईरान की चिंताएं और सुरक्षा की गारंटी
रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर और जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत में भविष्य की रणनीति सबसे अहम मुद्दा होगी। ईरान इस बात पर जोर दे रहा है कि उसे इस डील के पालन की ठोस गारंटी मिलनी चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि अभी तक डील की पूर्ण गारंटी नहीं मिली है और हालांकि दोनों पक्ष सैद्धांतिक रूप से कुछ मुद्दों पर सहमत हुए हैं, लेकिन फिलहाल पूर्ण समझौते की गुंजाइश तभी बनेगी जब सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित हो।
चीन की भूमिका और भविष्य का एक्शन प्लान
ईरान को मुख्य रूप से इस बात का डर है कि भविष्य में अमेरिका अपने वादों से मुकर सकता है, जिससे उसे फिर से युद्ध जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है और ईरान चाहता है कि कोई बड़ी वैश्विक शक्ति इस बात की जिम्मेदारी ले कि अमेरिका उस पर दोबारा हमला नहीं करेगा। इस भूमिका के लिए चीन को सबसे उपयुक्त माना जा रहा है क्योंकि चीन ईरान का एक भरोसेमंद सहयोगी देश रहा है। युद्ध के दौरान भी चीन ने ईरान को सैटेलाइट और हथियारों जैसी महत्वपूर्ण सहायता उपलब्ध कराई थी। ऐसे में मुनीर और जिनपिंग के बीच होने वाली यह मुलाकात इस समझौते के भविष्य और चीन द्वारा दी जाने वाली संभावित गारंटियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
