अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे लंबे तनाव को समाप्त करने और एक निर्णायक शांति समझौते तक पहुँचने के प्रयासों में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर द्वारा की गई मध्यस्थता की कोशिशें पूरी तरह विफल होने के बाद, अब कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को अपने हाथों में ले लिया है। अमेरिका द्वारा प्रस्तावित एक पन्ने के समझौते पर ईरान की ओर से आए जवाब को वाशिंगटन ने पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है, जिसके बाद बातचीत का यह दौर एक नए और चुनौतीपूर्ण मोड़ पर पहुँच गया है। अब कतर के प्रधानमंत्री अल-थानी अमेरिकी नेतृत्व के साथ मियामी में हुई गहन चर्चा के बाद ईरानी नेताओं से मुलाकात करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि इस गतिरोध को समाप्त किया जा सके।
आसिम मुनीर के प्रयासों को लगा बड़ा झटका
शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मध्यस्थता को उस समय गहरा धक्का लगा जब ईरान ने अमेरिका की शर्तों पर समझौता करने से साफ इनकार कर दिया और ईरान का स्पष्ट कहना है कि वह अमेरिका की शर्तों के आगे नहीं झुकेगा। इस वार्ता की सबसे बड़ी बाधा ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन के ठिकानों को नष्ट करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है, जो कि अमेरिकी प्रस्ताव की एक अनिवार्य शर्त थी और ईरान के इस कड़े रुख के बाद अमेरिका ने भी ईरानी जवाबी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से इस स्थिति की पुष्टि की है और ईरान के जवाब को अस्वीकार्य बताया है। मुनीर की इस विफलता ने इस पूरी प्रक्रिया में कतर की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य बना दिया है।
मियामी में कतर के प्रधानमंत्री की उच्च स्तरीय बैठकें
पाकिस्तान की विफलता के बाद कतर के प्रधानमंत्री अल-थानी तुरंत सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने समझौते का रास्ता तैयार करने के लिए अमेरिका में मोर्चा संभाल लिया है। थानी ने अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस, वार्ता दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर से अमेरिका के मियामी में मुलाकात की है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के प्रधानमंत्री अल-थानी पिछले हफ्ते किसी निजी कार्य से वाशिंगटन आए थे, जहाँ उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने उनसे संपर्क किया। इसके बाद थानी उनसे मिलने मियामी चले गए। उल्लेखनीय है कि उप राष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनेर इस दल के प्रमुख सदस्यों के रूप में काम कर रहे हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ एक पन्ने के समझौते पर सहमति बनाना है।
ट्रंप के चीन दौरे से पहले समझौते की समय सीमा
अमेरिकी प्रशासन की यह पुरजोर कोशिश है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित चीन दौरे से पहले इस एक पन्ने के समझौते प्रस्ताव पर दोनों पक्षों की सहमति बन जाए। राष्ट्रपति ट्रंप का चीन दौरा 13 से 15 मार्च तक प्रस्तावित है। अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान के माध्यम से यह प्रस्ताव ईरान को भेजा था, लेकिन ईरान का रुख समझौते को लेकर अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है और कतर की कोशिश है कि इस निर्धारित समय सीमा के भीतर ईरान को समझौते की मेज पर लाया जाए। अल-थानी अब अमेरिकी नेताओं से चर्चा के बाद सीधे ईरानी नेतृत्व से संवाद करेंगे ताकि ट्रंप के दौरे से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुँचा जा सके।
मध्यस्थता में कतर का अनुभव और मुख्य चुनौतियां
कतर के प्रधानमंत्री अल-थानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिल सौदे कराने में माहिर माना जाता है और ईरान को भी कतर पर गहरा भरोसा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंधों पर पहले समझौता कर ले। दूसरी तरफ, ईरान का रुख बेहद सख्त है और उसका कहना है कि जब तक उसे युद्ध और प्रतिबंधों के कारण हुए नुकसान का हर्जाना नहीं मिलेगा, तब तक वह बातचीत को आगे नहीं बढ़ाएगा।
