असम में भूकंप के तेज झटके: 4.2 की तीव्रता से कांपी धरती, लोगों में दहशत

असम के कई जिलों में रात करीब 9:10 बजे 4.2 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। झटके लगते ही लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल राज्य में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली है।

असम में एक बार फिर धरती कांपने से लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मंगलवार की रात करीब 9:10 बजे राज्य के कई जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। 2 मापी गई है। राज्य के विभिन्न इलाकों में जब लोगों ने हल्के और मध्यम दर्जे के झटके महसूस किए, तो वे तुरंत अपने घरों और इमारतों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे और हालांकि, राहत की बात यह है कि इस भूकंप से अब तक किसी भी प्रकार के बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

रविवार को भी महसूस हुए थे झटके

इससे पहले रविवार की देर रात भी असम और उसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंप की हलचल दर्ज की गई थी। उस दौरान असम के साथ-साथ मेघालय और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों में काफी तेज झटके महसूस किए गए थे। 7 थी और उसका केंद्र पड़ोसी देश भूटान के पास स्थित था। भूकंप का वह केंद्र असम के कुछ हिस्सों से लगभग 252 किमी की दूरी पर था, लेकिन इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूर्वोत्तर के एक बड़े हिस्से में लोग सहम गए थे। लगातार हो रही इन गतिविधियों ने क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक संवेदनशीलता

पूर्वोत्तर भारत में समय-समय पर छोटे और बड़े भूकंप आना एक सामान्य लेकिन चिंताजनक प्रक्रिया बन गई है और वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्र में बार-बार आने वाले भूकंपों का मुख्य कारण यहां की विशिष्ट भौगोलिक और भूगर्भीय स्थिति है। भू-वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि पूर्वोत्तर भारत की धरती उन सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के संगम के अत्यंत निकट स्थित है, जहां पृथ्वी के भीतर निरंतर हलचल होती रहती है। यही कारण है कि यह पूरा क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहां अक्सर धरती कांपती रहती है।

भारतीय और यूरेशियन प्लेटों का टकराव

भूकंप के पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर गौर करें तो पता चलता है कि भारतीय प्लेट लगातार उत्तर दिशा की ओर खिसक रही है और इस प्रक्रिया में वह यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। करोड़ों वर्षों से जारी इस निरंतर टक्कर और दबाव के कारण ही विशाल हिमालय पर्वतमाला का निर्माण हुआ था। यह भूगर्भीय प्रक्रिया आज भी थमी नहीं है और लगातार जारी है। इन विशाल प्लेटों के बीच जब तनाव एक सीमा से अधिक बढ़ जाता है, तो वह ऊर्जा के रूप में अचानक मुक्त होता है, जिससे भूकंप के झटके पैदा होते हैं और धरती हिलने लगती है।

असम और आसपास की फॉल्ट लाइन्स

असम की भूगर्भीय स्थिति इस लिहाज से बहुत अधिक संवेदनशील है क्योंकि राज्य के नीचे और इसके चारों ओर कई सक्रिय फॉल्ट लाइन्स मौजूद हैं। ये फॉल्ट लाइन्स दरअसल पृथ्वी की सतह के नीचे की वे दरारें हैं जहां चट्टानें एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं। जब इन दरारों वाले क्षेत्रों में दबाव का स्तर बढ़ जाता है, तो वहां से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जो भूकंप का रूप ले लेती है। असम के अलावा मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा में भी ठीक यही स्थिति बनी हुई है, जिससे पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र भूकंप के प्रति संवेदनशील बना रहता है।