बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। है, जिससे देश भर में चिंता और भय का माहौल गहराता जा रहा है। पिछले मात्र 18 दिनों में 6 हिंदू युवकों की निर्मम हत्याएं सामने आई हैं, जो इस बढ़ती अशांति का भयावह प्रमाण हैं। इन घटनाओं में सबसे हालिया और चौंकाने वाली वारदातें सोमवार को हुईं, जब 24 घंटे के भीतर दो हिंदू युवकों को मौत के घाट उतार दिया गया। इन लगातार हो रही हत्याओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शरत चक्रवर्ती मणि की नृशंस हत्या
सोमवार की रात नरसिंदी जिले में 40 वर्षीय किराना दुकान मालिक शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना पालाश उपजिला के चारसिंदुर बाजार में हुई, जहां मणि अपनी दुकान चला रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और बांग्लादेश के समाचार चैनल ब्लिट्ज के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। यह हमला उस समय हुआ जब मणि अपने दैनिक कार्य में। लगे हुए थे, जिससे यह घटना और भी भयावह हो जाती है।
शरत चक्रवर्ती मणि का जीवन सादगी भरा था और उनकी पत्नी अंतरा मुखर्जी एक गृहिणी हैं और उनका एक 12 साल का बेटा है। परिवार के सदस्यों ने, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर। बात की, बताया कि मणि का किसी से कोई विवाद नहीं था। वह पहले दक्षिण कोरिया में काम कर चुके थे और कुछ साल पहले ही बांग्लादेश लौटे थे, जहां उन्होंने अपनी किराना की दुकान खोली थी। उनका परिवार अब इस अचानक हुई त्रासदी से सदमे में है और न्याय की गुहार लगा रहा है। एक ऐसे व्यक्ति की हत्या, जिसका कोई ज्ञात शत्रु न हो, अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना को और बढ़ाती है।
पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की बर्बर हत्या
सोमवार को ही हुई दूसरी हृदय विदारक घटना में, जशोर के मणिरामपुर में हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी, जिन्हें राणा प्रताप के नाम से भी जाना जाता है, की गोली मारकर और गला रेतकर हत्या कर दी गई। 45 वर्षीय राणा प्रताप एक फैक्ट्री मालिक भी थे और 'बीडी खबर' के कार्यकारी संपादक के रूप में भी कार्यरत थे। यह हमला कोपालिया बाजार इलाके में शाम करीब 6 बजे हुआ, जब हमलावरों ने उन्हें उनकी आइस फैक्ट्री से बाहर बुलाया।
मणिरामपुर पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी (ओसी) मोहम्मद रजिउल्लाह खान ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राणा के सिर में तीन गोलियां मारी गईं और उनका गला रेत दिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और पुलिस ने घटनास्थल से 7 खाली कारतूस भी बरामद किए हैं, जो हमले की क्रूरता को दर्शाते हैं। पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच कर रही है। चश्मदीद रिपन हुसैन ने बताया कि हमलावर बाइक पर आए थे, उन्होंने राणा को बाहर बुलाया, कई गोलियां चलाईं और तुरंत फरार हो गए। राणा केशबपुर उपजिला के अरुआ गांव के एक स्कूल टीचर के बेटे थे और पिछले दो सालों से अपनी आइस फैक्ट्री चला रहे थे और उनकी हत्या ने पत्रकारिता समुदाय और स्थानीय व्यापारिक वर्ग में भी गहरा सदमा पहुंचाया है।
पिछले 18 दिनों में हुई 6 हिंदू युवकों की हत्याएं बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के एक भयावह पैटर्न को उजागर करती हैं। ये घटनाएं न केवल व्यक्तिगत त्रासदी हैं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और सुरक्षा संकट का संकेत भी हैं। इन हत्याओं की क्रूरता और आवृत्ति ने देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
18 दिनों में 6 हत्याएं: एक भयावह पैटर्न
पिछले महीने मयमनसिंह जिले में दीपु चंद्र दास, जो एक स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे, को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। इस बर्बर घटना के बाद उनके शव को एक पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी, जो हिंसा के चरम स्तर को दर्शाता है। यह घटना अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति का एक स्पष्ट उदाहरण है और दीपु चंद्र दास की हत्या ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया था और न्याय की मांग को तेज कर दिया था।
इसी तरह, पिछले हफ्ते 50 वर्षीय खोकन दास, जो एक हिंदू दवा दुकान मालिक और बीकेश मोबाइल बैंकिंग एजेंट थे, पर केहरभांगा बाजार में हमला किया गया और यह हमला तब हुआ जब वह अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। तिलाई इलाके के पास तीन से चार हमलावरों ने उन पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। खोकन दास जैसे मेहनती व्यक्ति की हत्या ने स्थानीय समुदाय। में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया है।
पिछले हफ्ते ही मयमनसिंह में बजेंद्र बिस्वास नामक एक हिंदू गारमेंट फैक्ट्री कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई और बजेंद्र बिस्वास की हत्या भी एक ऐसे समय में हुई है जब अल्पसंख्यक समुदाय पहले से ही असुरक्षित महसूस कर रहा है। ड्यूटी पर रहते हुए एक कर्मचारी की हत्या ने कार्यस्थलों पर भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और इन लगातार हो रही हत्याओं से यह स्पष्ट होता है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय एक गंभीर खतरे का सामना कर रहा है और उन्हें तत्काल सुरक्षा और न्याय की आवश्यकता है। इन घटनाओं पर सरकार और संबंधित अधिकारियों की ओर से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।
बढ़ती हिंसा पर चिंता और प्रतिक्रिया
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं और मानवाधिकार संगठन और अल्पसंख्यक समुदाय के नेता इन घटनाओं की कड़ी निंदा कर रहे हैं और सरकार से अपराधियों को तुरंत पकड़ने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की मांग कर रहे हैं। इन हत्याओं ने देश की धर्मनिरपेक्ष छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दर्शाते हैं। कि अल्पसंख्यकों को अभी भी अपने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कुछ मामलों में जांच शुरू करने और हमलावरों को पकड़ने का आश्वासन दिया है, लेकिन समुदाय में विश्वास बहाल करने के लिए और अधिक ठोस कदमों की आवश्यकता है। इन घटनाओं का दोहराव यह बताता है कि केवल जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है। सरकार को इन अपराधों के पीछे के मूल कारणों की पहचान करनी होगी और उन्हें जड़ से खत्म करने के लिए कठोर। उपाय करने होंगे, ताकि बांग्लादेश में सभी नागरिक, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।