भारत ने पड़ोसी देश चीन को एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति तथा स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। विदेश मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को यह बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के लंबित मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है। भारत सरकार का यह रुख ऐसे समय में आया है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और सैन्य तैनाती को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं हो रही हैं और विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया है कि जब चीनी सेना की तरफ से पहले से तय किए गए गश्त के तौर-तरीकों में बदलाव किया जाता है या उनका उल्लंघन किया जाता है, तो उससे ज़मीनी स्तर पर स्थिति बदल जाती है और भारत को भी अपनी तरफ से गश्त के तौर-तरीकों में बदलाव करने पड़ते हैं।
एलएसी पर गश्त के तौर-तरीकों और सेना की गतिविधियों पर बयान
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन की सेनाओं की पेट्रोलिंग और गश्त को लेकर विदेश मंत्रालय की तरफ से विस्तृत सफाई दी गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दोनों देश एलएसी पर बचे हुए और लंबित मुद्दों को पूरी तरह से सुलझाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और इसके अलावा, किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन यानी मिसअंडरस्टैंडिंग एंड मिसकैलकुलेशन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी है कि बेहतर सीमा प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके, जिसके लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की समझ को और अधिक बेहतर बनाने के विभिन्न तरीकों पर गंभीरता से चर्चा की जा रही है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का समग्र विकास तभी संभव है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण रूप से शांति और स्थिरता कायम रखी जाए।
आईटीबीपी महानिदेशक के दावे और विवाद की पृष्ठभूमि
आपको बता दें कि इस पूरे मामले पर कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा तब शुरू हुई थी जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक अहम बयान दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव की स्थिति अभी भी बनी हुई है। आईटीबीपी प्रमुख ने जवानों को संबोधित करते हुए यह भी खुलासा किया था कि वर्तमान समय में भी अरुणाचल प्रदेश के कई ऐसे इलाके हैं जहां दोनों तरफ की सेनाएं आमने-सामने की स्थिति में डटी हुई हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम के दौरान मौके पर तैनात हमारी शौर्य कमांडो टीमों के साहस और शौर्य की सराहना करते हुए कहा कि इन टीमों ने बेहद शानदार और सराहनीय प्रदर्शन किया है और आईटीबीपी महानिदेशक के इस दावे और बयान के सामने आने के बाद से ही कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी और मीडिया में भी सीमा की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस
आईटीबीपी महानिदेशक के इन दावों और बयानों से जुड़े एक तीखे सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विस्तार से अपनी बात रखी। रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जहां तक इस विशिष्ट मुद्दे के विस्तृत विवरण और आंतरिक जानकारियों का सवाल है, मैं आप सभी से अनुरोध और आग्रह करूंगा कि इसकी आधिकारिक जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जाए। हालांकि, विदेश नीति और कूटनीति के मोर्चे पर उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जैसा कि हमने अपने पिछले बयानों में भी कई बार उल्लेख किया है, जब-जब चीनी सेनाएं अपनी तरफ से पहले से तयशुदा गश्त के तौर-तरीकों से भटकती हैं या उनमें बदलाव करती हैं, तब-तब भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर बिगड़ जाती है।
राजनयिक और सैन्य तंत्रों का निरंतर उपयोग
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने संबोधन में आगे यह भी जोड़ा कि दोनों ही देश यानी भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर मौजूद तमाम बचे हुए और अनसुलझे मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने के रास्ते पर हैं। किसी भी संभावित गलतफहमी या सामरिक गलत आकलन से बचने के लिए दोनों देशों के बीच जो स्थापित राजनयिक और सैन्य तंत्र हैं, उनका लगातार उपयोग किया जा रहा है ताकि तनाव को बढ़ने से रोका जा सके। बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए दोनों पक्षों ने यह भी सहमति जताई है कि उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की वास्तविक समझ को और बेहतर बनाने के नए तौर-तरीकों पर विचार किया जाए। अंत में प्रवक्ता ने दोहराया कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सतर्क है, लेकिन कूटनीतिक संवाद के दरवाजे हमेशा खुले रखे गए हैं ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रह सके।
