मुंबई / हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकार बनाएगी बीजेपी, बागियों से सम्पर्क

Zoom News : Oct 25, 2019, 08:25 PM

दिल्ली. मुम्बई। देश के दो राज्यों हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कवायद दीपावली त्योहार के माहौल में और भी रोचक हो चली है। मुख्यमंत्री कौन होगा और सरकार कौन बनाएगा यह सवाल महाराष्ट्र में स्पष्ट बहुमत के बाद भी कायम है तो हरियाणा में बीजेपी ने निर्दलियों का समर्थन लेने का दावा किया है। निर्दलीय गोपाल गोयल कांडा के खुद को आरएसएस से जुड़ा बताने और बिना शर्त समर्थन की बात कहने के बाद सोशल मीडिया पर वे ट्रेंड रहे। याद रहे कि ये वही गोपाल कांडा है, जिन पर एक एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का मामला खासा सुर्खियों में रहा था। कांडा इस मामले में जेल भी गए थे। 

बीजेपी का कहना है कि वह हरियाणा में निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाएगी। अब हरियाणा में बीजेपी के पास 47 विधायक होने का दावा किया जा रहा है। सीएम मनोहरलाल खट्टर ने पार्टी कार्यवाहक अध्यक्ष जेपी नड्ढा से मुलाकात की। निर्दलीय विधायक भी साथ रहे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और बीजेपी महासचिव अरुणसिंह को हरियाणा में सरकार बनाने का जिम्मा सौंपा गया है और उनके नेतृत्व में शनिवार को 11 बजे विधयाक दल की बैठक होगी। इस में निर्दलीय भी शामिल रहेंगे। 

महाराष्ट्र में बीजेपी—शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला है। परन्तु शिवसेना मुखिया उद्धव ठाकरे का कहना 50—50 फार्मूले से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। यहां बीजेपी का कहना है कि देवेन्द्र फड़नवीस एक बार फिर बन सकते हैं मुख्यमंत्री। 

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवेसना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत (161 सीट) मिला है। 50-50 फॉर्मूले को लेकर जारी खींचतान के बीच सत्ता समीकरणों को लेकर बयान आने शुरू हो गए हैं। महाराष्ट्र के कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहब थोराट ने कहा कि शिवसेना की तरफ से गठबंधन का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। लेकिन, अगर ऐसा होता है तो वे इस संबंध में पार्टी पदाधिकारियों से बात करेंगे। वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार ने गठबंधन की संभावनाओं को खारिज करते हुए मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने की बात कही है। यहां पर 288 सदस्यों वाली विधानसभा के चुनाव में भाजपा के पास 105, शिवसेना के पास 56, राकांपा के पास 54 और कांग्रेस के पास 44 सीटें आई हैं। 

थोराट ने कहा- नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि जनमत संग्रह भाजपा के खिलाफ है। हमने जनता के फैसले को स्वीकार किया है और मजबूत विपक्ष के रूप में जनता की सेवा को तैयार हैं। हमें कम सीटें मिली हैं। हमें लगता है कि यह एक जनमत संग्रह है। हम यह भी मानते हैं कि जनता ने हमें पांच साल के लिए फिर से विपक्ष में बैठने की जिम्मेदारी दी है। 

चह्वाण ने कहा था- राकांपा-शिवसेना-कांग्रेस साथ आ सकती हैं

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने नतीजों के बाद गुरुवार को चौंकाने वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस साथ आ सकती हैं। शिवसेना नेता द्वारा एक कार्टून शेयर करने के बाद तो चर्चाएं और गरम हो चली हैं।