चीन का परमाणु चक्रव्यूह: रेगिस्तान में ड्रैगन की गुप्त तैयारी ने उड़ाई अमेरिका और जापान की नींद

चीन के शिनजियांग प्रांत में सैटेलाइट तस्वीरों ने एक विशाल परमाणु चक्रव्यूह का खुलासा किया है। ड्रैगन 350 नए मिसाइल साइलो और तीन परतों वाले सैन्य अड्डों के जरिए अपनी परमाणु शक्ति को अभेद्य बना रहा है, जिससे अमेरिका और जापान के बीच भारी तनाव पैदा हो गया है।

दुनिया की सामरिक राजनीति में इस समय चीन की परमाणु तैयारियों को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है और सब जानते हैं कि चीन अपना परमाणु जखीरा तेजी से बढ़ा रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने एक ऐसे अनोखे चक्रव्यूह का खुलासा किया है जिसे चीन अपने परमाणु मिसाइलों की सुरक्षा के लिए रेगिस्तान में तैयार कर रहा है। पश्चिमी मीडिया के हाथ लगी इन तस्वीरों में चीन का वह परमाणु चक्रव्यूह नजर आ रहा है, जिसे भेद पाना अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए भी एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। चीन अपनी सैन्य शक्ति और तैयारियों को हमेशा गुप्त रखता है, लेकिन आसमानी नजरों ने जिनपिंग के इस बड़े राज का पर्दाफाश कर दिया है, जिससे टोक्यो से लेकर वॉशिंगटन तक खलबली मच गई है।

350 नए मिसाइल साइलो का विशाल निर्माण

चीन की इस गुप्त योजना के तहत वह लगभग 350 नए मिसाइल साइलो विकसित कर रहा है। इसे वर्तमान समय में दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु निर्माण कार्यक्रम माना जा रहा है और इनमें से कई साइलो विशेष रूप से आईसीएमबी यानी इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए तैयार किए गए हैं। इन मिसाइलों की मारक क्षमता 12000 किलोमीटर से भी अधिक है। इसका सीधा मतलब यह है कि चीन की धरती से दागी गई मिसाइल बहुत आसानी से अमेरिका के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती है। यह विस्तार चीन की उस मंशा को दर्शाता है जिसमें वह अपनी परमाणु पहुंच को वैश्विक स्तर पर और अधिक घातक बनाना चाहता है।

सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई अमेरिका की बेचैनी

अमेरिका की चिंता का मुख्य कारण वे सैटेलाइट तस्वीरें हैं जो चीन के शिनजियांग प्रांत के एक सुदूर रेगिस्तान से ली गई हैं। यह वही इलाका है जहां चीन ने अपने परमाणु हथियारों का विशाल जखीरा और लंबी दूरी की मिसाइलों का भंडार छिपा रखा है। अपने इस बेशकीमती परमाणु भंडार की रक्षा के लिए चीन ने रेगिस्तान में बहुत बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया है। तस्वीरों में परमाणु भंडार के पास नए लॉन्च पैड, बंकर और संचार प्रणालियों का एक विशाल नेटवर्क स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यह निर्माण चीन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने परमाणु हथियारों को किसी भी बाहरी हमले से सुरक्षित रखना चाहता है।

तीन परतों वाला अष्टकोणीय चक्रव्यूह

कुछ समय पहले तक रेगिस्तान का जो इलाका पूरी तरह सुनसान और बियाबान नजर आता था, वहां अब मिसाइलों का एक पूरा शहर बस चुका है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन ने यहां तीन परतों वाला एक सुरक्षा चक्रव्यूह बनाया है।

शिनजियांग में बंकरों और लॉन्च पैड्स का जाल

चीन ने इस न्यूक्लियर चक्रव्यूह का निर्माण अपने पूर्वी शिनजियांग प्रांत में किया है। वहां उसने अपनी सबसे लंबी दूरी की मिसाइलों वाले साइलो के पास 80 से ज्यादा नए कंक्रीट लॉन्च पैड्स और बंकरों का एक पूरा नेटवर्क बिछा दिया है। रेगिस्तान में बनाए गए ये कंक्रीट पैड्स इतने विशाल हैं कि इनका इस्तेमाल चीन की मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स की फ्लीट और एयर-डिफेंस मिसाइल बैटरियों के लिए बहुत आसानी से किया जा सकता है। यह बुनियादी ढांचा चीन को युद्ध की स्थिति में अपनी मिसाइलों को तेजी से तैनात करने और उन्हें सुरक्षित रखने की क्षमता प्रदान करता है।

2030 तक 1000 परमाणु हथियारों का लक्ष्य

अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास इस समय करीब 600 परमाणु हथियार मौजूद हैं। जिस रफ्तार से चीन इन हथियारों का उत्पादन और उनकी सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2030 तक चीन के पास न्यूक्लियर वॉरहेड्स की संख्या 1000 को पार कर जाएगी। इसका अर्थ है कि अमेरिका और रूस की तरह अब चीन भी एक पूर्ण परमाणु महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा चुका है और जिनपिंग का लक्ष्य स्पष्ट है कि यदि भविष्य में कभी अमेरिका के साथ युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो उनकी परमाणु ताकत पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी रहे, और इसी उद्देश्य के लिए रेगिस्तान में यह विशाल चक्रव्यूह तैयार किया गया है।