सीएम विजय का करूर दौरा: भगदड़ पीड़ितों की याद में स्मारक का ऐलान, परिजनों को मिली नौकरी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने करूर में 10 किलोमीटर लंबा रोड शो किया और भगदड़ में जान गंवाने वाले 32 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने 1700 करोड़ रुपये की परियोजना की आधारशिला भी रखी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय आज करूर के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक दौरे पर पहुंचे। मुख्यमंत्री बनने के बाद जोसेफ विजय का करूर का यह पहला दौरा है। करूर वही स्थान है जहां चुनाव प्रचार के दौरान हुई एक दुखद भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी। मुख्यमंत्री ने अपने इस दौरे की शुरुआत एक विशाल 10 किलोमीटर लंबे रोड शो के साथ की, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए। इस रोड शो के माध्यम से उन्होंने जनता से सीधा संवाद किया और फिर एटलस ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में पहुंचे।

पीड़ितों को सहायता और औद्योगिक विकास की सौगात

करूर के एटलस ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने भगदड़ हादसे में जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इस हादसे में मरने वाले परिवारों के 32 सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। यह कदम उन परिवारों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है और इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 1700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली एक प्रस्तावित नॉन लेदर यूनिट की आधारशिला भी रखी। यह परियोजना करूर के आर्थिक परिदृश्य को बदलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

जनसभा में भावुक हुए मुख्यमंत्री

नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जीवन की कोई भी सफलता उन निर्दोष लोगों की जान जाने के दर्द को कम नहीं कर सकती। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि जीवन में कोई व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई पर क्यों न पहुंच जाए, दिल के कुछ दर्द और घाव ऐसे होते हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके जीवन में जिस घटना ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित और आहत किया है, वह करूर की यही दुखद घटना है।

पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने हादसे से पहले की परिस्थितियों का विवरण देते हुए तत्कालीन सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि उनका राज्यव्यापी जनता सम्मेलन कार्यक्रम जनता की चिंताओं को समझने और उनसे सीधे जुड़ने के लिए आयोजित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ की आशंका को देखते हुए पुलिस ने उन्हें पेरंबालूर में एक कार्यक्रम रद्द करने की सलाह दी थी, लेकिन करूर में इतनी भारी भीड़ होने के बावजूद कार्यक्रम से पहले उन्हें किसी भी तरह की चेतावनी नहीं दी गई और उन्होंने सवाल किया कि जब वे नमक्कल की बैठक के बाद करूर आ रहे थे, तो क्या करूर पुलिस उन्हें सूचित नहीं कर सकती थी? उन्होंने कहा कि अगर पुलिस को लगता कि भीड़ को संभालना मुश्किल होगा, तो उनके पास बैठक रद्द करने का पूरा अधिकार था। इसके बजाय, पुलिस उन्हें कार्यक्रम स्थल तक ले गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पुलिस पर पूरा भरोसा किया था और उस दिन अधिकारियों को धन्यवाद भी दिया था, उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि ऐसी त्रासदी हो जाएगी।

स्मारक का ऐलान और राजनीतिक साजिश का जिक्र

विजय ने पिछली सरकार और घटना के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस त्रासदी के लिए कौन जिम्मेदार है और आदेश किसके द्वारा दिए गए थे। उन्होंने पूछा कि क्या इतनी बड़ी भीड़ के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई थी? उन्होंने अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए कहा कि पहले जब उनकी तस्वीर टीवी पर आती थी, तो बच्चे उन्हें विजय अंकल कहकर पुकारते थे और मुस्कुराते थे। उन्होंने उन मासूम बच्चों को खोने पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि शोक में डूबे होने के बावजूद कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया और उन पर भागकर छिपने का झूठा आरोप लगाया। इस घटना की याद को संजोने और भविष्य में ऐसी त्रास्तियों के राजनीतिकरण को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने करूर में एक स्मारक बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि टीवीके की ओर से यह स्मारक इसलिए बनाया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां हमारे खिलाफ रची गई साजिशों और षड्यंत्रों के बारे में जान सकें और भविष्य में कोई भी ऐसी राजनीतिक साजिश करने की हिम्मत न करे।