यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मंत्री नंदी से छिनी यूपीडा की कमान, अब सीधे सीएम योगी करेंगे मॉनिटरिंग

उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी से यूपीडा की जिम्मेदारी वापस ले ली है। अब यह महत्वपूर्ण प्राधिकरण सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन होगा, जिससे राज्य की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के अधिकार क्षेत्र में बड़ी कटौती की है। कैबिनेट मंत्री नंदी के पास अब तक मौजूद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की जिम्मेदारी उनके मंत्रालय से वापस ले ली गई है। अब यूपीडा सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन आने वाले अवस्थापना विकास विभाग के अंतर्गत कार्य करेगा। वर्ष 2022 में दूसरी बार सरकार के गठन के बाद, नंद गोपाल गुप्ता नंदी को औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई और निवेश प्रोत्साहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

प्रशासनिक आदेश और बदलाव के मुख्य कारण

सचिवालय प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश पर सचिवालय प्रशासन विभाग के सचिव गुर्राला श्रीनिवासुलु के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विभागीय कार्य बंटवारे में आने वाली जटिलताओं और पत्रावलियों के अनुमोदन में उत्पन्न होने वाली भ्रम की स्थिति को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब तक यूपीडा से जुड़ी परियोजनाओं, बजट और मंजूरी से संबंधित फाइलें औद्योगिक विकास मंत्री के माध्यम से आगे बढ़ती थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री का अंतिम अनुमोदन प्राप्त किया जाता था। नई व्यवस्था के तहत, ये फाइलें अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से क्लियर होंगी, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

यूपीडा के अधीन चल रहे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स

यूपीडा को उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचा विकास का सबसे महत्वपूर्ण और भारी-भरकम बजट वाला प्राधिकरण माना जाता है और वर्तमान में इसके अंतर्गत कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यूपीडा मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की देखरेख कर रहा है:

  • चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस-वे
  • आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे
  • फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे

इनके अलावा, पांच नए लिंक एक्सप्रेस-वे भी प्रस्तावित हैं, जिनमें जेवर लिंक, झांसी लिंक, मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। यूपीडा न केवल एक्सप्रेस-वे के निर्माण और मरम्मत की जिम्मेदारी संभालता है, बल्कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का भी नेतृत्व करता है।

बदलाव के सियासी और प्रशासनिक मायने

प्रशासनिक रूप से सामान्य बताए जा रहे इस आदेश को लेकर उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में काफी चर्चा है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी का प्रभावी अधिकार क्षेत्र कम हो गया है। हाल के दिनों में मंत्री नंदी और विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार के बीच तबादलों और नियुक्तियों को लेकर विवाद की खबरें सामने आई थीं। मंत्री नंदी ने यूपीडा के कार्यों को लेकर विभागीय अधिकारियों से कई बार स्पष्टीकरण भी मांगा था। अब यूपीडा से जुड़े सभी बड़े फैसले और दस्तावेज सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अवस्थापना विकास विभाग के माध्यम से गुजरेंगे।

कार्यप्रणाली में सुधार की कवायद

जी श्रीनिवासुलु द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि औद्योगिक विकास विभाग के अनुभाग 3 के तहत यूपीडा के कार्यों का आवंटन किया गया था। निर्धारित लागत सीमा से अधिक की अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर नीति निर्धारण और तालमेल बिठाने का काम अब अवस्थापना विकास अनुभाग करेगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य काम के आवंटन में विरोधाभास को दूर करना और संबंधित दस्तावेजों के समाधान को सरल बनाना है। यूपीडा से संबंधित सभी कार्य तत्काल प्रभाव से अवस्थापना विकास अनुभाग को सौंप दिए गए हैं, जिससे राज्य की विकास योजनाओं को नई गति मिलने की संभावना है।