मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर भड़की कांग्रेस जीतू पटवारी का बड़ा ऐलान

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से कांग्रेस में भारी रोष है। जीतू पटवारी ने इसे भाजपा की सीट डकैती करार दिया है और बुधवार को चुनाव आयोग के खिलाफ भूख हड़ताल की घोषणा की है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर एक बड़ा घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के बाद से पार्टी बेहद आक्रोशित है। कांग्रेस ने इस कदम को पूरी तरह से असंवैधानिक करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। इस घटनाक्रम ने राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और कांग्रेस ने अब सड़क पर उतरने का फैसला किया है।

जीतू पटवारी का भाजपा पर बड़ा हमला और भूख हड़ताल की घोषणा

मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा पर "सीट डकैती" का गंभीर आरोप लगाया है। पटवारी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन कानूनी आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक द्वेष के चलते रद्द किया गया है और उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि कानूनी रूप से नामांकन रद्द करने का कोई ठोस आधार नहीं था, इसलिए सत्ता के दबाव में यह रास्ता चुना गया। पटवारी ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि अभी कुछ समय पहले ही भाजपा ने महिला आरक्षण को लेकर बड़ा ढोंग रचा था, लेकिन आज एक महिला प्रत्याशी को रोकने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

जीतू पटवारी ने घोषणा की है कि इस अन्याय के विरोध में कांग्रेस के सभी विधायक 10 जून यानी बुधवार को चुनाव आयोग के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक सीट की नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र को बचाने की है। पटवारी के अनुसार, भाजपा की यह करतूत संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का एक और प्रमाण है। उन्होंने संकल्प जताया कि सत्य और न्याय की इस लड़ाई को हर स्तर पर लड़ा जाएगा और कांग्रेस इसमें हर हाल में जीत हासिल करेगी।

कानूनी पक्ष और रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर सवाल

कांग्रेस के वकील अजय गुप्ता ने नामांकन रद्द करने के आदेश को पूरी तरह से असंवैधानिक और "गुंडागर्दी वाला आदेश" बताया है और उन्होंने स्पष्ट किया कि हैदराबाद के एक न्यायालय से मीनाक्षी नटराजन को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसे नामांकन के दौरान छिपाया नहीं गया था। गुप्ता ने दावा किया कि यह नोटिस किसी भी तरह से आपराधिक श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कानून की पढ़ाई करने वाला पहले वर्ष का छात्र भी यह बता सकता है कि यह कोई अपराध नहीं है, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके किसी भी तर्क को सुनने से इनकार कर दिया।

अजय गुप्ता ने विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और इसे "दादागिरी" करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह से फैसले लेने हैं, तो चुनाव की औपचारिकता करने की क्या जरूरत है? उन्होंने सुझाव दिया कि भाजपा की सीट सीधे दिल्ली से ही घोषित कर दी जानी चाहिए थी। यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

कमल नाथ और हरीश चौधरी की तीखी प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल नाथ ने भी इस घटना पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है और उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया जाना लोकतंत्र और संविधान की हत्या के समान है। कमल नाथ ने जोर देकर कहा कि भाजपा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट करने पर तुली हुई है और कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया।

वहीं, कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या देश में चुनाव आयोग का अस्तित्व बचा भी है या नहीं? चौधरी ने तर्क दिया कि देश में ऐसे कई निर्वाचित सांसद हैं जिनके खिलाफ कानूनी नोटिस जारी होते रहते हैं, लेकिन उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने इसे सरकार की तानाशाही का एक स्पष्ट उदाहरण बताया और कहा कि यह कदम पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।