डिंपल यादव का भाजपा पर आरोप: वोट डिलीट करने की साजिश और बजट की आलोचना

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने मैनपुरी में भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश, चुनाव आयोग की कथित पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली और हालिया केंद्रीय बजट की तीखी आलोचना की। यादव ने अमेरिकी व्यापार समझौते और चीनी मांझे के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखे प्रहार किए। यादव ने सरकार पर एक सोची-समझी साजिश के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया है। उन्होंने विशेष रूप से एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की आलोचना करते हुए इसे विपक्षी मतदाताओं को लक्षित करने का एक उपकरण बताया। सांसद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और इसे सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करने वाला बताया।

मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर आरोप

डिंपल यादव ने दावा किया कि भाजपा आगामी चुनावों में हार के डर से मतदाताओं के नाम कटवा रही है। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से उन क्षेत्रों में वोट डिलीट किए जा रहे हैं जहां समाजवादी पार्टी का प्रभाव अधिक है। यादव के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए समय सीमा एक महीने बढ़ा दी है, जो उनकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और बीएलओ (BLO) के साथ निरंतर संपर्क में रहने का निर्देश दिया ताकि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से न हटे और सांसद ने स्पष्ट किया कि यह लोकतंत्र को कमजोर करने का एक प्रयास है जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

केंद्रीय बजट और ममता बनर्जी का समर्थन

सांसद ने हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट को 'नीरस' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बजट में मध्यम वर्ग के लिए कोई राहत नहीं दी गई है और यह आम जनता की खुशियों में कोई योगदान नहीं देता है। यादव ने तर्क दिया कि बजट में कोई भी ऐसा क्रांतिकारी निर्णय नहीं है जो देश की आर्थिक स्थिति को जमीनी स्तर पर सुधार सके। इसके साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग लाने के उनके विचार में समाजवादी पार्टी और पूरा विपक्ष उनके साथ खड़ा है। यादव ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं के ढांचे को जानबूझकर क्षति पहुंचाई जा रही है और विपक्ष एकजुट होकर इसका विरोध करेगा।

फिल्म 'घूसखोर पंडित' और चीनी मांझे पर विवाद

फिल्म 'घूसखोर पंडित' को लेकर चल रहे विवाद पर डिंपल यादव ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में ही ऐसी फिल्मों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी फिल्में समाज में भेदभाव पैदा करने और वोट बैंक की राजनीति को साधने के लिए बनाई जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा की सत्ता में ही ऐसी विवादास्पद फिल्में क्यों आती हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने चीनी मांझे के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल मांझे पर ही नहीं, बल्कि चीन से आने वाले उन सभी सामानों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए जो भारतीय नागरिकों के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

अमेरिकी व्यापार समझौता और किसानों की स्थिति

अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते पर टिप्पणी करते हुए डिंपल यादव ने कहा कि इससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए देश के कृषि बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोल रही है। उनके अनुसार, यह कदम भारतीय किसानों की जीविका को संकट में डाल देगा और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर करेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर कहा कि सभी वर्गों ने एकजुट होकर सपा का समर्थन किया है, जिससे भाजपा असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में भी जनता भाजपा की नीतियों के खिलाफ मतदान करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का दृष्टिकोण

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डिंपल यादव के ये बयान आगामी स्थानीय और विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी की आक्रामक रणनीति का हिस्सा हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची के मुद्दे को उठाकर सपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना चाहती है। वहीं, बजट और व्यापार समझौतों पर उनकी टिप्पणी ग्रामीण और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास है। विशेषज्ञों का कहना है कि विपक्षी दलों द्वारा संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना आने वाले समय में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, सपा का ममता बनर्जी के साथ खड़ा होना राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने का संकेत है।

निष्कर्ष

मैनपुरी में डिंपल यादव के संबोधन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों तक, समाजवादी पार्टी ने भाजपा को कई मोर्चों पर घेरने की कोशिश की है। सांसद ने स्पष्ट किया कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और इसका आगामी चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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