भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस ने चीन को दिया सस्ता तेल

भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापारिक समझौते के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात में कटौती की है। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने चीन को भारी छूट पर तेल बेचना शुरू कर दिया है। जनवरी 2026 में चीन ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल आयात किया है।

भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापारिक समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात में की गई महत्वपूर्ण कटौती के बाद रूस ने अपने तेल भंडार का रुख चीन की ओर कर दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, रूस अब चीन को भारी छूट पर कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है, जिससे चीन के आयात ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह बदलाव तब आया है जब भारत ने अमेरिकी व्यापारिक शर्तों के तहत अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव किया है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और तेल आयात पर प्रभाव

इस भू-राजनीतिक बदलाव की मुख्य वजह भारत और अमेरिका के बीच हुआ एक रणनीतिक व्यापारिक समझौता है। समझौते के तहत, अमेरिका ने भारत से आने वाले विभिन्न सामानों पर लगने वाले टैरिफ में कटौती की है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वाशिंगटन ने इस छूट के बदले भारत से रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने का आग्रह किया था। इस शर्त के प्रभावी होने के बाद, भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

रूस द्वारा चीन को दी जा रही भारी छूट

भारतीय बाजार में मांग कम होने के कारण रूस ने अपने तेल भंडार को खपाने के लिए चीन को बड़े स्तर पर आकर्षित करना शुरू किया है और रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने चीन के लिए तेल की कीमतों में भारी कटौती की है। वर्तमान में, चीन को भेजे जाने वाले रूसी 'ESPO Blend' तेल पर छूट बढ़कर लगभग $9 प्रति बैरल हो गई है, जो पहले $7 से $8 के बीच थी। इसके अतिरिक्त, 'यूराल्स' ग्रेड के तेल पर, जो पहले भारत का पसंदीदा था, अब लगभग $12 प्रति बैरल की छूट दी जा रही है।

चीन का रिकॉर्ड तोड़ तेल आयात

सस्ते रूसी तेल की उपलब्धता ने चीन को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने का अवसर दिया है। केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में चीन ने रूस से समुद्र के रास्ते रिकॉर्ड 17 लाख बैरल तेल प्रतिदिन का आयात किया। 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक बताया गया है। चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां इस भारी छूट का लाभ उठाकर न केवल अपनी परिचालन लागत कम कर रही हैं, बल्कि अपने रणनीतिक तेल भंडार को भी भर रही हैं।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और भारत की भविष्य की स्थिति

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों के अनुसार, भारत रूसी तेल की खरीद को पूरी तरह बंद नहीं करेगा, लेकिन इसमें बड़ी गिरावट जारी रह सकती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत भविष्य में प्रतिदिन लगभग 8 लाख से 10 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रख सकता है, जो उसकी कुल तेल आवश्यकता का 17% से 21% होगा। यह पिछले साल जून के 20 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से काफी कम है। जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 11 लाख बैरल पर आ गया है, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

निष्कर्ष

रूस, भारत और चीन के बीच का यह त्रिकोणीय ऊर्जा समीकरण वैश्विक तेल राजनीति में एक नया मोड़ है और जहां भारत ने अमेरिका के साथ व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी है, वहीं रूस ने चीन के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को और अधिक गहरा कर लिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या रूस अपनी कीमतों में और कटौती करता है या भारत अपनी ऊर्जा नीति में पुनः कोई बदलाव लाता है।

SUBSCRIBE TO OUR NEWSLETTER