होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पनामा कैनाल का मुद्दा गरमा दिया है। एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने पनामा कैनाल को पनामा देश को सौंपने के ऐतिहासिक फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने इस कदम को एक बड़ी बेवकूफी करार देते हुए कहा कि अमेरिका को इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण कभी नहीं छोड़ना चाहिए था। ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब वैश्विक शिपिंग मार्ग भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक दबावों के कारण चर्चा के केंद्र में हैं।
हैंडओवर की आलोचना और बढ़ती ट्रांजिट फीस
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार यानी 1 जुलाई को मेडोरा में थियोडोर रूज़वेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन के अवसर पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने साल 1977 में हुई टोरिजोस-कार्टर संधियों का जिक्र किया, जिसके तहत अमेरिका पनामा नहर का नियंत्रण सौंपने के लिए सहमत हुआ था। हालांकि इस नहर का निर्माण अमेरिका द्वारा साल 1914 में किया गया था, लेकिन इसे साल 1999 में औपचारिक रूप से पनामा को सौंप दिया गया। ट्रंप ने इस फैसले को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि पनामा ने नहर पर ट्रांजिट फीस में भारी बढ़ोतरी की है। उन्होंने कहा कि पनामा ने सबसे पहले जहाजों के लिए कीमतें चार गुना बढ़ा दीं और इसके बावजूद जहाजों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। इसके बाद उन्होंने दो बार और कीमतें बढ़ाईं। ट्रंप के अनुसार, पनामा ने इससे सालों-साल बहुत पैसा कमाया है, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा आर्थिक नुकसान है।
चीन के बढ़ते प्रभाव पर ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप के संबोधन का एक बड़ा हिस्सा पनामा कैनाल पर चीन के बढ़ते प्रभाव पर केंद्रित था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वाशिंगटन पनामा कैनाल पर चीन को कब्जा नहीं जमाने देगा। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका इस अहम जलमार्ग पर बीजिंग द्वारा नियंत्रण करने की किसी भी कोशिश का पूरी तरह से विरोध करेगा। उनका यह रुख रणनीतिक वैश्विक स्थानों पर चीनी विस्तारवाद का मुकाबला करने की उनकी व्यापक विदेश नीति का हिस्सा है। राष्ट्रपति की टिप्पणियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि यह नहर न केवल एक व्यापारिक मार्ग है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है।
पनामा कैनाल का रणनीतिक और आर्थिक महत्व
पनामा कैनाल को दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में गिना जाता है। यह नहर अटलांटिक की तरफ कैरिबियन सागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है। यह मार्ग कोलोन से शुरू होकर गैटुन झील और गैलार्ड कट से गुजरते हुए पनामा सिटी तक पहुंचता है। इस नहर के निर्माण से पहले, अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को दक्षिण अमेरिका के चारों ओर मैगलन जलडमरूमध्य या केप हॉर्न से होकर जाना पड़ता था। इससे यात्रा की दूरी और समय दोनों बहुत अधिक बढ़ जाते थे। इस कैनाल के बनने के बाद न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को के बीच की दूरी लगभग 8000 मील कम हो गई थी, जिससे शिपिंग उद्योग के लिए समय और लागत दोनों की भारी बचत हुई।
