शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने दिया इस्तीफा : NEET पेपर लीक पर 36 दिनों के विरोध के बाद बड़ा फैसला

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर उन्हें दोषी बताते हुए जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिन से लगातार धरना प्रदर्शन चल रहा था। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना था कि वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम में किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होंगे और धर्मेंद्र प्रधान ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पत्र जारी करके अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी की प्रतिक्रिया और सोनम वांगचुक का समर्थन

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि कॉकरोच की जीत हुई। यह पार्टी पिछले 36 दिन से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटी हुई थी। इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी बड़ा समर्थन मिला, जिन्होंने प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। पेपर लीक पर बढ़ते बवाल और छात्रों के आक्रोश के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और शिक्षा मंत्री ने अपना पद छोड़ दिया।

धर्मेंद्र प्रधान का भावुक पोस्ट और जिम्मेदारी का संकल्प

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने लंबे पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पहले ही दिन से उन्होंने इस मामले पर जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने लिखा कि मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। प्रधान ने बताया कि वे पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार भी व्यक्त किया।

नीट परीक्षा का घटनाक्रम और सीबीआई जांच

इस्तीफे के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा से जुड़े तथ्यों को भी सामने रखा और उन्होंने बताया कि 3 मई 2026 को हुई नीट-यूजी की परीक्षा में अनियमितता पाई गई थी। भारत सरकार ने इसे तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द कर दिया। इसके बाद पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। प्रधान ने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित करना उनकी प्राथमिकता थी। इसके लिए राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण की गई। 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि के छात्रों को भी सफलता मिली।

इस्तीफे के पीछे के मुख्य कारण और भविष्य की योजना

इस्तीफे की वजह बताते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर और देश में जो भ्रम की स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है। वे चाहते हैं कि देश की एकता बनी रहे और किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने करियर पर फोकस करें। प्रधान ने यह भी घोषणा की कि अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने अंत में कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से भविष्य में भी ओडिशा की जनता और देश के युवाओं के लिए समर्पित रहेंगे।