गूगल क्लाउड भारत में अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऑपरेशन्स में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव कर रहा है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसके नवीनतम एआई मॉडल अब भारत में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर डिप्लॉय किए जा रहे हैं और इस बड़े तकनीकी बदलाव का सीधा मतलब यह है कि अब डेटा और एआई प्रोसेसिंग दोनों ही चीजें भारत की भौगोलिक सीमाओं के भीतर ही रहेंगी। भारतीय कंपनियां पहले से ही क्लाउड के माध्यम से जेमिनी और गूगल की अन्य एआई सेवाओं का उपयोग कर रही थीं, लेकिन अब यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गूगल के लेटेस्ट एआई मॉडल का संचालन भी स्थानीय स्तर पर ही हो।
थॉमस कुरियन का विजन और रणनीतिक बदलाव
इकोनॉमिक टाइम्स को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में गूगल क्लाउड के चीफ एग्जीक्यूटिव थॉमस कुरियन ने विस्तार से बताया कि कंपनी अब अपने लेटेस्ट एआई मॉडल को भारत में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर डिप्लॉय कर रही है। इससे भारतीय कंपनियां अपना डेटा और एआई प्रोसेसिंग दोनों ही देश के अंदर सुरक्षित रख सकेंगी और यह कदम वैश्विक क्लाउड कंप्यूटिंग में हो रहे एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जहां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की लोकेशन भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है जितने कि खुद एआई मॉडल। गूगल की इस घोषणा से स्पष्ट है कि कंपनी भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक एआई हब के तौर पर देख रही है।
लोकल होस्टिंग और इन्फरेंस प्रोसेस का महत्व
कुरियन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान बताया कि कंपनी अपनी नवीनतम एआई सुविधाएं इसलिए ला रही है ताकि भारत में मौजूद मशीनों से ही सेवाएं दी जा सकें। अब तक स्थिति यह थी कि कोई भारतीय कंपनी गूगल क्लाउड के जरिए जेमिनी का इस्तेमाल तो कर सकती थी, लेकिन असल एआई इन्फरेंस प्रोसेस हमेशा भारत के अंदर ही हो, यह अनिवार्य नहीं था। कई मामलों में सर्विस के डिप्लॉयमेंट और मॉडल की उपलब्धता के आधार पर रिक्वेस्ट को किसी दूसरे गूगल क्लाउड रीजन में प्रोसेस किया जा सकता था। यानी ग्राहक भारत में होता था, लेकिन मॉडल विदेश में चल रहा होता था। अब गूगल अपने लेटेस्ट जेमिनी मॉडल और एआई एजेंट बनाने के लिए अपने प्लेटफॉर्म जेमिनी एंटरप्राइज़ को भारत में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर लागू कर रहा है।
डिजिटल संप्रभुता और रेगुलेटेड सेक्टर्स
इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह डिजिटल सॉवरेनिटी यानी डिजिटल संप्रभुता का बढ़ता महत्व है। दुनिया भर की सरकारें अब इस बात को लेकर बहुत अधिक संवेदनशील हो रही हैं कि डेटा कहां स्टोर किया जाता है और एआई सिस्टम उस जानकारी को कहां प्रोसेस करते हैं। विशेष रूप से नियमों के दायरे में आने वाले क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, टेलीकॉम ऑपरेटर्स, हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और सरकारी विभागों की कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि उनका संवेदनशील डेटा कभी भी देश की सीमाओं से बाहर न जाए। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को अब टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क या एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह ही एक रणनीतिक संपत्ति के तौर पर देखा जा रहा है। कुरियन ने कहा कि गूगल डिजिटल संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रहा है।
प्रतिस्पर्धा और बाजार की स्थिति
गूगल भारत में स्थानीय डेटा रेजिडेंसी की पेशकश करने वाला अकेला क्लाउड प्रदाता नहीं है और इस क्षेत्र में उसकी कड़ी टक्कर माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर, अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) और ओरेकल क्लाउड से है। ये सभी कंपनियां भारत में अपने क्लाउड क्षेत्रों का संचालन करती हैं जो बिजनेस को स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोर और प्रोसेस करने की अनुमति देते हैं। माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर एआई और एज़्योर ओपनएआई के माध्यम से सेवाएं देता है, जबकि एडब्ल्यूएस अमेज़न बेडरॉक के जरिए फाउंडेशन मॉडल पेश करता है। ओरेकल ने भी अपने भारतीय क्लाउड क्षेत्रों के जरिए जेनरेटिव एआई सेवाएं उपलब्ध कराई हैं और गूगल का यह नया कदम उसे भारतीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
