गूगल ने लॉन्च किया जेमिनी 3.5 फ्लैश लो: कम टोकन में मिलेगा बेहतर एआई अनुभव

गूगल ने अपने एंटीग्रेविटी प्लेटफॉर्म के लिए जेमिनी 3.5 फ्लैश लो मॉडल पेश किया है। यह नया वेरिएंट आउटपुट में 45 प्रतिशत कम टोकन खर्च करता है, जिससे यूजर्स की रेट लिमिट जल्दी खत्म नहीं होगी और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कार्यों में बेहतर प्रदर्शन मिलेगा।

5 फ्लैश लो मॉडल आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह नया मॉडल विशेष रूप से गूगल के एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म एंटीग्रेविटी के उपयोगकर्ताओं के लिए पेश किया गया है। कंपनी का यह कदम उन डेवलपर्स के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है जो पिछले कुछ समय से टोकन की खपत और रेट लिमिट की समस्याओं से जूझ रहे थे।

टोकन की खपत और रेट लिमिट की समस्या का समाधान

5 फ्लैश लो मॉडल को लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को एक ऐसा विकल्प देना है जो कम संसाधनों में बेहतर परिणाम दे सके। गूगल के अनुसार, यह नया वेरिएंट कम टोकन खर्च करेगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को जल्दी रेट लिमिट खत्म होने की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हाल ही में गूगल ने अपने सिस्टम में एक बड़ा बदलाव किया था, जिसके तहत मैसेज बेस्ड सिस्टम को हटाकर कंप्यूट बेस्ड यूसेज सिस्टम लागू किया गया था।

इस बदलाव के बाद, कई उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की थी कि साधारण और छोटे कार्यों में भी टोकन बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं। 5 फ्लैश लो को बाजार में उतारा है। यह मॉडल उन डेवलपर्स के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा जो लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं और अपने टोकन को बचाना चाहते हैं।

गूगल डीपमाइंड और वरुण मोहन का बयान

गूगल डीपमाइंड में एंटीग्रेविटी प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी संभालने वाले वरुण मोहन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस नए मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्वीकार किया कि कई उपयोगकर्ताओं ने साधारण कामों में अत्यधिक टोकन खर्च होने की शिकायत की थी। 5 फ्लैश लो वेरिएंट को तैयार किया है।

गूगल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह नया मॉडल आउटपुट देने के दौरान लगभग 45 प्रतिशत कम टोकन का इस्तेमाल करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टोकन की खपत कम होने के बावजूद इसकी परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं आई है। कंपनी का दावा है कि यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यों में बेहतरीन परिणाम देता है और पुराने मॉडल्स की तुलना में अधिक कुशल है।

फ्लैश मॉडल का नया वर्गीकरण

गूगल ने अब अपने जेमिनी 3.5 फ्लैश मॉडल को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर दिया है, ताकि उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के हिसाब से सही मॉडल का चुनाव कर सकें:

  • जेमिनी 3.5 फ्लैश लो: यह मॉडल साधारण और रोजमर्रा के कोडिंग कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त है।
  • जेमिनी 3.5 फ्लैश मीडियम: पहले से मौजूद मॉडल को अब मीडियम श्रेणी में रखा गया है, जो सामान्य कार्यों के लिए है।
  • जेमिनी 3.5 फ्लैश हाई: इस वेरिएंट को विशेष रूप से जटिल और भारी टास्क को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस वर्गीकरण से उपयोगकर्ताओं को अपने प्रोजेक्ट्स को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी और वे अनावश्यक रूप से अपने कंप्यूट कोटा को खर्च नहीं करेंगे।

फ्री यूजर्स के लिए खुशखबरी और कोटा रीसेट

नए मॉडल की लॉन्चिंग के साथ ही गूगल ने इस हफ्ते सभी प्लान्स के लिए जेमिनी कोटा को रीसेट करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का सीधा लाभ फ्री यूजर्स को भी मिलेगा, जो अब बिना किसी रुकावट के अपने एआई प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकेंगे। कंपनी का लक्ष्य है कि उपयोगकर्ता बिना किसी तकनीकी बाधा के गूगल के एआई टूल्स का अधिकतम लाभ उठा सकें।

इमेज जनरेशन लिमिट पर चर्चा

टोकन की समस्या सुलझने के बीच, कुछ उपयोगकर्ताओं ने इमेज जनरेशन की सीमा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने तुलना करते हुए बताया कि जहां कोडेक्स पर 1000 इमेज बनाई जा सकती हैं, वहीं एंटीग्रेविटी के अल्ट्रा प्लान में केवल 24 इमेज जनरेट करने की अनुमति मिल रही है। इस मुद्दे पर वरुण मोहन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए माना कि यह सीमा वास्तव में काफी कम है और इसमें सुधार की आवश्यकता है और हालांकि, उन्होंने नई लिमिट कब लागू होगी, इस बारे में कोई आधिकारिक तारीख या जानकारी साझा नहीं की है।