Rajasthan / सरकार का बड़ा फैसला, 7 लाख किसानों को मिलेगा ब्याजमुक्त फसल ऋण

Zoom News : Jun 05, 2021, 07:04 AM
जयपुर। कर्जमाफी के बाद फसली ऋण से वंचित अवधिपार ऋणी किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब इन किसानों को भी ब्याजमुक्त फसली ऋण  (Interest Free Crop Loan)  मिल पाएगा। राज्य सरकार के इस फैसले से साढ़े 7 लाख से ज्यादा किसानों को लाभ मिलेगा। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने यह जानकारी देते हुए बताया कि साल 2018 और 2019 में हुई ऋणमाफी में ऐसे किसान जिन पर 5 हजार रुपए से ज्यादा राशि का अवधिपार फसली ऋण बकाया था और जिन पर वर्तमान में कोई ऋण बकाया नहीं था उन्हें अभी फसली ऋण नहीं दिया जा रहा था। फसली ऋण नहीं मिलने से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अब राज्य सरकार द्वारा इन किसानों को खरीफ 2021 फसली चक्र से अल्पकालीन साख सुविधा से जोड़ते हुए फसली ऋण उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है।

25 हजार तक का मिलेगा ऋण

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के मुताबिक ऐसे किसान को अब 25 हजार रुपए या उसकी साख सीमा में से जो भी कम हो उतनी राशि का ऋण मिल पाएगा। जिला केन्द्री सहकारी बैंकों के माध्यम से फसली ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। सहकारिता मंत्री ने कहा कि बैंकों की तरलता के आधार पर आगामी फसली चक्रों में ऋण की राशि में बढ़ोतरी की जाएगी। गौरतलब है कि ऐसे किसानों को फसल ऋण के दायरे में लाने के लिए अतिरिक्त रजिस्ट्रार की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। आंजना ने कहा कि सभी किसानों को ब्याजमुक्त ऋण की सुविधा देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। अब तक 5 हजार रुपए से कम बकाया ऋण वाले किसानों को ही फसली ऋण दिया जा रहा था। अब सरकार के फैसले से सभी किसान सहकारी फसली ऋण के दायरे में आ गए हैं।

इसलिए आ रही थी दिक्कतें

प्रदेश में दो बार कर्जमाफी की गई। साल 2018 में वसुंधरा शासन में और साल 2019 में गहलोत शासन में कर्जमाफी हुई। कर्जमाफी में ज्यादातर किसानों के सम्पूर्ण कर्ज माफ कर दिए गए। राज्य सरकार ने कर्ज की राशि सहकारी बैंकों को चुकता कर दी। जिन किसानों का ऋण अवधिपार चल रहा था उनकी राशि भी राज्य सरकार द्वारा बैंकों को चुका दी गई और इस तरह किसान कर्ज मुक्त हो गए। लेकिन सहकारी बैंकों ने इन अवधिपार ऋणी किसानों को दोबारा ऋण देना बंद कर दिया। किसान संगठन लगातार इन किसानों को ब्याजमुक्त फसली ऋण मुहैया करवाने की आवाज उठा रहे थे जिसे अब मान लिया गया है।

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