दुनिया को लंबे समय से यह डर सता रहा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइंस बिछाई गईं, तो उनका खतरा केवल होर्मुज तक ही सीमित नहीं रहेगा। अब यह डर हकीकत में बदलता दिख रहा है क्योंकि ओमान के मुसंदम तट के पास कुछ तैरती हुई समुद्री माइंस देखी गई हैं। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट को चरम पर पहुंचा दिया गया है। सवाल अब केवल एक तट के पास दिखी माइन का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन अब कितनी सुरक्षित बची है?
आपातकालीन कदम और आर्थिक प्रभाव
ओमान के मुसंदम द्वीप के पास समुद्री पानी में तैरती हुई माइंस दिखने के तुरंत बाद ओमान सरकार ने एक इमरजेंसी एडवाइजरी जारी की है। इसके परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र से गुजरने वाले किसी भी प्रकार के जहाज पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। स्थानीय मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है और यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को तुरंत अपना रास्ता बदलने का आदेश दिया गया है। ओमान के तट के आसपास इन तैरती माइंस को ढूंढने और उन्हें निष्क्रिय करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। यह खतरा पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है क्योंकि खाड़ी के इसी संकरे रास्ते से होकर दुनिया का एक तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। यहां होने वाला एक भी धमाका पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला सकता है।
ओमान से कुवैत तक फैला डेंजर जोन
खतरा केवल ओमान के तट तक सीमित नहीं है। जिस तरह की माइंस ओमान के पास देखी गई हैं, वे समुद्री लहरों के साथ बहकर अब तक कितने बड़े इलाके में फैल चुकी हैं, इसका सटीक अंदाजा किसी को नहीं है। यह खतरा अब ओमान से लेकर कुवैत तक फैल गया है, जिसका अर्थ है कि ओमान की खाड़ी से लेकर फारस की खाड़ी तक हर लहर के साथ बारूद बहने का अंदेशा है। होर्मुज का पूरा इलाका अब एक बारूदी जाल में तब्दील हो चुका है। इन माइंस को जल्दबाजी में बिछाया गया था और इनका कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं रखा गया, जिसके कारण आज इनकी सही लोकेशन का पता लगाना लगभग असंभव हो गया है। समुद्र की तेज धाराओं ने इन्हें अपनी मूल जगह से हटा दिया है, जिससे खतरा और भी अनियंत्रित हो गया है।
माइंस को हटाना: एक बड़ी चुनौती
इन माइंस को ढूंढना और उन्हें हटाना वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यह एक अत्यंत उच्च जोखिम वाला ऑपरेशन है जिसमें बहुत अधिक समय लगने की संभावना है, क्योंकि समुद्र से माइंस को जल्दी हटाने की तकनीक अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं है। सबसे खतरनाक पहलू उन लापता माइंस का है जो समुद्र में अदृश्य खतरे के रूप में हर दिशा में फैली हुई हैं। वर्तमान में जिसे सुरक्षित रास्ता बताया जा रहा है, वह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। समुद्र में एक भी माइन मिलने का मतलब पूरे तेल मार्ग पर संकट है। यदि होर्मुज का रास्ता खोल भी दिया जाता है, तब भी सतह के नीचे छिपी ये माइंस किसी भी बड़े जहाज को पल भर में डुबो सकती हैं।
3 लाख वर्ग किलोमीटर का बारूदी गलियारा
ओमान से लेकर कुवैत तक फैला यह बारूदी खतरा अब पूरी फारस की खाड़ी को अपनी चपेट में ले चुका है और नक्शे पर यह खतरनाक गलियारा लगभग 1000 किलोमीटर की लंबाई और 200 से 300 किलोमीटर की चौड़ाई में फैला हुआ है। कुल मिलाकर 300000 वर्ग किलोमीटर का यह विशाल समुद्री क्षेत्र अब एक डेंजर जोन बन चुका है। ईरान द्वारा होर्मुज में बिछाई गई घातक माइंस अब बहकर ओमान के तटों तक पहुंच गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ओमान ने व्यावसायिक जहाजों और स्थानीय मछुआरों के लिए हाई अलर्ट जारी रखा है।
इतिहास का दोहराव: 1980 का टैंकर वॉर
आज से 4 दशक पहले दुनिया ने खाड़ी में ऐसा ही एक संकट देखा था। 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के दौरान व्यावसायिक तेल टैंकरों को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। उस संघर्ष के दौरान 543 से अधिक जहाजों पर हमले हुए थे, जिनमें से 61 प्रतिशत तेल टैंकर थे। कुल 239 पेट्रोलियम टैंकरों पर सीधा हमला हुआ था, जिनमें से 55 टैंकर पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। इतिहास में इस दौर को 'टैंकर वॉर' के नाम से जाना जाता है। उस समय भी समुद्री माइंस सबसे घातक हथियार साबित हुई थीं। जुलाई 1987 में अमेरिकी सुरक्षा में जा रहा कुवैती टैंकर SS ब्रिजटन और अप्रैल 1988 में अमेरिकी युद्धपोत USS सैमुअल बी रॉबर्ट्स ईरानी माइंस की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए थे। आज फिर वही स्थिति पैदा हो गई है, जहां माइंस बिछाने वाली IRGC नौसेना को भी नहीं पता कि ये माइंस अब कहां हैं।
मूरड माइंस का तकनीकी खतरा
तेल टैंकर समुद्र की सतह पर चलते हैं, लेकिन सबसे बड़ा खतरा पानी के नीचे छिपा होता है और समुद्र के अंदर अलग-अलग गहराई पर माइंस लगाई गई हैं। तल पर स्थित बॉटम माइंस और पानी के बीच में तैरती मूरड माइंस सतह से दिखाई नहीं देतीं, जिससे जहाजों को खतरे का पता ही नहीं चलता। इस खतरे में अब खुद ईरान की नौसेना भी फंसती नजर आ रही है और अमेरिकी बमबारी में ईरानी नौसेना का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है और उन नावों के भी खत्म होने की आशंका है जिन्होंने ये माइंस बिछाई थीं। अब ये माइंस समुद्री धाराओं के साथ पूरे रूट में फैल चुकी हैं और इन्हें ढूंढने की कोशिश कर रही IRGC की नावों को भी 'लोकेशन मिसिंग' के सिग्नल मिल रहे हैं।
विनाशकारी महाम-3 माइंस
होर्मुज में सबसे अधिक मूरड माइंस का उपयोग किया गया है, जिन्हें भारी एंकर और स्टील केबल के जरिए समुद्र तल से बांधा जाता है। लेकिन समुद्री दबाव और जंग के कारण कई केबल टूट चुके हैं, जिससे ये माइंस अब फ्लोटिंग माइंस बनकर अनियंत्रित रूप से बह रही हैं। ओमान के पास देखी गई माइन ईरान की महाम-3 माइन हो सकती है, जिसका वजन लगभग 300 किलोग्राम है। इतनी भारी माइन किसी भी बड़े कार्गो शिप या तेल टैंकर को तबाह करने के लिए काफी है। ज्वार-भाटे के साथ ये माइंस अपनी जगह बदल रही हैं, जिससे समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके कारण शिपिंग लागत और बीमा खर्च में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है, जो अंततः वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करेगी।
