ऊर्जा संकट: युद्ध के बीच क्या भारत में लगेगा लॉकडाउन? पीएम मोदी की बड़ी अपील

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के कारण भारत में ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है। 85% कच्चे तेल के आयात पर निर्भर भारत के लिए पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल बचाने और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की विशेष अपील की है।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब एक पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंताएं गहरा गई हैं। इस युद्ध की स्थिति में खाड़ी देश और पश्चिमी मुल्क एकजुट होकर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान ने भी बदलती परिस्थितियों को देखते हुए अपने सभी दुश्मनों को कड़ा सबक सिखाने की चेतावनी दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और अधिक भड़कता है, तो खाड़ी देशों से भारत को होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

पश्चिम एशिया पर भारत की ऊर्जा निर्भरता

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसका एक बहुत बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है। ऊर्जा सुरक्षा के मामले में यह निर्भरता केवल कच्चे तेल तक ही सीमित नहीं है। देश में आने वाली कुल प्राकृतिक गैस का 60 प्रतिशत और रसोई गैस (LPG) का 90 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग से होकर भारत पहुंचता है। ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लगातार 100 अरब डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत के लिए तेल खरीदना अत्यंत महंगा होता जा रहा है।

आपूर्ति ठप होने की आशंका और आर्थिक प्रभाव

यदि ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष एक खुले युद्ध का रूप ले लेता है, तो खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह से ठप होने की प्रबल आशंका है। इस संभावित संकट को देखते हुए भारत सरकार सतर्क हो गई है। तेल की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान ने देश के सामने एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। इसी खतरे को भांपते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विशेष अपील की है ताकि आने वाले समय में ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।

प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से महत्वपूर्ण अपील

ऊर्जा संकट की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का अधिक से अधिक उपयोग करें। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि वे फिलहाल विदेश यात्राओं से बचें और सोने (Gold) की खरीद को कम से कम एक साल के लिए टाल दें।

स्वदेशी उत्पादों और घरेलू संसाधनों पर जोर

प्रधानमंत्री ने इस संकट काल में घरेलू चीजों के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया है। उनका मानना है कि स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देकर और अनावश्यक खर्चों में कटौती करके देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाया जा सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से ये सुझाव दिए गए हैं। 28 फरवरी से भड़के इस संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई परिस्थितियों ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति और उपभोग के तरीकों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र की स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए इन उपायों का उद्देश्य युद्ध की स्थिति में देश को आत्मनिर्भर बनाना और ऊर्जा की कमी से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करना है। जैसे-जैसे यह संघर्ष आगे बढ़ रहा है, भारत की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर टिकी हुई हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर इसका कम से कम प्रभाव पड़े।