होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी जीत वेनेजुएला बना तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर खतरे के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वेनेजुएला से तेल आयात में भारी बढ़ोतरी की है। मई में वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिससे सऊदी अरब और अमेरिका पीछे छूट गए हैं।

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर मंडराते संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने तेल आपूर्ति के लिए उन रास्तों और देशों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है जिनकी निर्भरता होर्मुज स्ट्रेट पर नहीं है और इस नई रणनीति के तहत दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला भारत के लिए एक बड़े और भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उभरा है। करीब 2 पॉइंट 75 करोड़ की आबादी वाला यह देश अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। वेनेजुएला ने इस मामले में सऊदी अरब और अमेरिका जैसे बड़े देशों को भी पीछे छोड़ दिया है, जो भारत की बदलती ऊर्जा प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

वेनेजुएला से तेल आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों पर नजर रखने वाली कंपनी केपलर (Kpler) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने की 20 तारीख तक वेनेजुएला ने भारत को प्रतिदिन औसतन 4 पॉइंट 17 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा है। अगर इसकी तुलना अप्रैल महीने से की जाए, तो उस समय यह आंकड़ा 2 पॉइंट 83 लाख बैरल प्रतिदिन था। गौरतलब है कि इससे पहले लगातार नौ महीनों तक भारत ने वेनेजुएला से तेल की कोई खरीद नहीं की थी। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद यह आपूर्ति फिर से शुरू हुई है। भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी रिफाइनरी कंपनियां वेनेजुएला के सस्ते और भारी ग्रेड वाले तेल को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे भारत के आयात बिल में भी संतुलन बना हुआ है।

राजनयिक संबंध और अमेरिकी रुख

भारत और वेनेजुएला के बीच बढ़ते इन संबंधों को वैश्विक स्तर पर भी बारीकी से देखा जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में एक बयान में कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आएंगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तेल आपूर्ति और ऊर्जा सहयोग को और अधिक विस्तार देना है। रुबियो ने भारत को अमेरिका का एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार बताया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है, जो भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

मई महीने के आयात आंकड़े और देशों की रैंकिंग

मई के महीने में भारत का कुल तेल आयात 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 49 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जहां से प्रतिदिन 19 पॉइंट 83 लाख बैरल तेल आ रहा है। इस सूची में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दूसरे स्थान पर है, जबकि वेनेजुएला ने तीसरे स्थान पर अपनी जगह पक्की कर ली है। दूसरी ओर, सऊदी अरब से होने वाली तेल की आपूर्ति में गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 3 पॉइंट 40 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है। भारत अब अपनी जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने विकल्पों को फैला रहा है।

विविधीकरण की दिशा में भारत के बढ़ते कदम

भारत केवल वेनेजुएला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह अंगोला, ब्राजील और नाइजीरिया जैसे देशों से भी तेल की खरीद बढ़ा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूएई यात्रा के दौरान भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। एडनॉक (ADNOC) और इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत भारत के रणनीतिक तेल भंडार में यूएई की हिस्सेदारी 3 करोड़ बैरल तक बढ़ जाएगी। इसके अलावा, आईओसीएल और एडनॉक के बीच एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी करार हुआ है। भारत का यह रुख उसके पुराने अनुभवों से भी प्रेरित है, जैसे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान प्रतिबंधों की चेतावनी के बाद भारत को ईरान से तेल खरीद कम करनी पड़ी थी। अब भारत अपनी तेल आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर नए विकल्प तलाश रहा है।