भारत और अफगानिस्तान के बीच मुल्लांपुर के मैदान पर खेला जा रहा एकमात्र टेस्ट मैच भारतीय टीम के पूर्ण दबदबे का गवाह बन रहा है। खेल के दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कोरबोर्ड पर 500 से अधिक रन टांग दिए हैं। हालांकि, इस विशाल स्कोर तक पहुंचने में अफगानिस्तान की टीम ने भी अनजाने में भारत की काफी मदद की है। अफगान टीम की ओर से डीआरएस (DRS) लेने में की गई बार-बार की गलतियों और मैदान पर खराब फील्डिंग ने भारतीय सितारों को कई बड़े जीवनदान दिए और इन मौकों का भरपूर फायदा उठाते हुए केएल राहुल, शुभमन गिल और ऋषभ पंत ने बड़ी पारियां खेलीं और मैच पर भारत की पकड़ को पूरी तरह से मजबूत कर दिया है।
केएल राहुल को मिला शुरुआती जीवनदान और शतक
मैच के पहले दिन जब भारतीय टीम अपनी पारी को आगे बढ़ा रही थी, तब अफगानिस्तान के पास केएल राहुल को सस्ते में आउट करने का एक बेहतरीन मौका था। पारी के 11वें ओवर में, जब राहुल मात्र 16 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, जियाउर रहमान की एक गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर के पास गई। अफगान खिलाड़ियों ने जोरदार अपील की, लेकिन मैदानी अंपायर ने उसे नकार दिया। कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने काफी सोच-विचार के बाद डीआरएस नहीं लेने का फैसला किया। बाद में जब बड़ी स्क्रीन पर रिप्ले देखा गया, तो यह साफ हो गया कि गेंद बल्ले से लगकर गई थी। इस बड़ी चूक का खामियाजा अफगानिस्तान को पूरे मैच में भुगतना पड़ा और राहुल ने इस जीवनदान का फायदा उठाते हुए एक शानदार शतक जड़ दिया। राहुल की इस पारी की बदौलत भारत ने पहले दिन 3 विकेट के नुकसान पर 368 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था।
दूसरे दिन की डीआरएस त्रासदी: गिल और पंत को मिले मौके
दूसरे दिन भी अफगानिस्तान की किस्मत में कोई सुधार नहीं दिखा और डीआरएस को लेकर उनकी दुविधा बरकरार रही। मैच का 89वां ओवर, जिसे अजमतुल्लाह उमरजई फेंक रहे थे, अफगानिस्तान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। इस ओवर की चौथी गेंद पर शुभमन गिल एक तेज इनस्विंगर पर चकमा खा गए और गेंद सीधे उनके घुटने के पैड पर जा लगी और पूरी अफगान टीम ने एलबीडब्ल्यू (LBW) की जोरदार अपील की, लेकिन अंपायर के मना करने के बाद उन्होंने रिव्यू नहीं लिया। हॉक आई तकनीक में बाद में साफ हुआ कि गेंद सीधे लेग स्टंप के ऊपरी हिस्से को हिट कर रही थी। उस समय गिल 108 रन पर खेल रहे थे और इस जीवनदान के बाद उन्होंने अपनी पारी को 126 रनों तक पहुंचाया।
हैरानी की बात यह रही कि गिल के बचने के तुरंत बाद अगली ही गेंद पर ऋषभ पंत के खिलाफ भी अफगानिस्तान ने वही गलती दोहराई। पंत के बल्ले का हल्का किनारा लगा और गेंद विकेटकीपर के दस्तानों में गई, लेकिन अफगान टीम ने फिर से डीआरएस का इस्तेमाल नहीं किया और अल्ट्राएज तकनीक में बल्ले और गेंद का संपर्क स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पंत ने इस जीवनदान का लाभ उठाते हुए अपनी पारी में 27 रन और जोड़े और कुल 81 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक ही ओवर में दो बार डीआरएस न लेना अफगानिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महंगा साबित हुआ और इसने भारतीय टीम को 500 रनों के पार पहुंचाने में मदद की।
फील्डिंग में भी दिखी भारी कमजोरी
अफगानिस्तान की मुश्किलें केवल तकनीक और डीआरएस तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उनकी फील्डिंग ने भी उन्हें काफी निराश किया। मैच के पहले ही दिन अफगान फील्डरों ने दो बेहद आसान कैच टपका दिए थे, जिससे भारतीय बल्लेबाजों को क्रीज पर जमने और लंबी साझेदारी करने का पूरा मौका मिला। इन गलतियों ने न केवल भारतीय टीम को एक विशाल स्कोर तक पहुंचने में मदद की, बल्कि अफगान गेंदबाजों के मनोबल को भी बुरी तरह प्रभावित किया। मुल्लांपुर टेस्ट में अब तक का खेल पूरी तरह से भारत के पक्ष में रहा है, जिसका मुख्य कारण अफगानिस्तान की रणनीतिक विफलताएं और मैदान पर की गई बुनियादी गलतियां हैं। अब अफगानिस्तान के सामने इस मैच को बचाने की एक बड़ी चुनौती खड़ी है।
