ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची को हटाने की तैयारी, सांसदों ने शुरू की महाभियोग की प्रक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कुर्सी खतरे में है। वरिष्ठ सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, देश के महत्वपूर्ण सुरक्षा और परमाणु मुद्दों पर अब राष्ट्रपति के बजाय IRGC कमांडर अहमद वाहिदी का वर्चस्व बढ़ गया है।

ईरान की राजनीति में इस समय बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वहां के कुछ सांसदों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उनके पद से हटाने की तैयारी पूरी कर ली है। इस घटनाक्रम ने ईरान की आंतरिक राजनीति में चल रहे सत्ता संघर्ष को उजागर कर दिया है। ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ सांसद होसैनअली हाजीदेलिगानी ने मंगलवार को इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने विदेश मंत्री के खिलाफ कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

महाभियोग की तैयारी और दस्तावेजों का संकलन

वरिष्ठ सांसद होसैनअली हाजीदेलिगानी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे और उनके साथी सांसद अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं और उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में अराघची के खिलाफ जरूरी सबूत और महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। हाजीदेलिगानी के अनुसार, जैसे ही दस्तावेजों का संकलन पूरा हो जाएगा और सही समय आएगा, वे इस महाभियोग की प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर शुरू कर देंगे। यह कदम विदेश मंत्री की कार्यप्रणाली पर सांसदों के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है और सरकार के भीतर एक बड़े टकराव की ओर इशारा करता है।

सत्ता के केंद्र में बदलाव और IRGC का बढ़ता प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की शक्तियों में कमी आई है। अब देश के बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर निर्णय लेने की शक्ति का केंद्र बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत जैसे विषयों पर अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कमांडर अहमद वाहिदी का फैसला ही अंतिम माना जाएगा। यह बदलाव ईरान की शासन व्यवस्था में सैन्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करता है, जिससे राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होती दिख रही है।

राजनयिक वार्ताओं पर उठाए गए गंभीर सवाल

सांसद हाजीदेलिगानी ने अमेरिका के साथ युद्धविराम के दौरान की गई बातचीत पर भी कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उस विशेष समय में अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत करना एक गलत निर्णय था। उनके तर्क के अनुसार, इस तरह की बातचीत की शुरुआत भविष्य में दोबारा युद्ध की स्थिति पैदा होने का कारण बन सकती है और वे इस कूटनीतिक दृष्टिकोण को ईरान के हितों के विपरीत मान रहे हैं और उनका मानना है कि ऐसी वार्ताओं से देश की स्थिति कमजोर हुई है।

संप्रभुता और संवैधानिक मर्यादा का मुद्दा

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए हाजीदेलिगानी ने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई भी समझौता ईरान की संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और उन्होंने विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी समझौते के तहत ईरान के समुद्री क्षेत्र के किसी भी हिस्से पर किसी दूसरे देश का नियंत्रण स्वीकार किया जाता है, तो वह सीधे तौर पर ईरान के संविधान का उल्लंघन होगा। सांसदों का यह समूह विदेश मंत्री पर इन संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा है और इसे महाभियोग का मुख्य आधार बना रहा है।