ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते तनाव और एक संभावित नए युद्ध के खतरे के बीच, ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली सैन्य चेहरे के रूप में उभरे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहिदी को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो ईरान की अगली सैन्य रणनीति और बड़े फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और वर्तमान में, वह ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उनकी कट्टर सोच और अमेरिका के प्रति उनके कड़े रुख ने उन्हें वैश्विक चर्चा का केंद्र बना दिया है।
नेतृत्व का परिवर्तन और युद्ध की पृष्ठभूमि
अहमद वाहिदी ने आईआरजीसी के मुखिया का पद एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय में संभाला था। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के पुराने कमांडर मोहम्मद पकपोर की मौत हो गई थी। इस घटना को ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा संघर्ष की शुरुआत का पहला दिन भी माना जाता है। पकपोर की जगह वाहिदी की नियुक्ति यह दर्शाती है कि ईरानी नेतृत्व को उनकी युद्धक क्षमताओं और रणनीतिक सूझबूझ पर कितना भरोसा है।
वाहिदी का इतिहास विवादों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाइयों से भरा रहा है। अमेरिका उन पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि वाहिदी ने ईरान के भीतर होने वाले सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, वह इंटरपोल की मोस्ट वांटेड सूची में भी शामिल हैं। इंटरपोल उन्हें 1994 में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में हुए एक भीषण बम धमाके के मामले में तलाश रहा है। यह हमला एक यहूदी कम्युनिटी सेंटर पर हुआ था, जिसमें 85 लोगों की जान चली गई थी।
अमेरिका के साथ समझौते का कड़ा विरोध
सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अहमद वाहिदी ईरान के उन नेताओं में से हैं जो अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के समझौते या नरमी के सख्त खिलाफ हैं। उन्हें ईरान के सबसे कट्टरपंथी सैन्य नेताओं में गिना जाता है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ अली वाएज के अनुसार, हालांकि ईरान में महत्वपूर्ण निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, लेकिन वाहिदी की राय और उनके सुझावों को सत्ता के गलियारों में बहुत अधिक महत्व दिया जाता है।
इजराइल की सैन्य खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी डैनी सिट्रिनोविच ने वाहिदी के व्यक्तित्व पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह एक बहुत ही सख्त और अडिग सोच वाले नेता हैं। उनके अनुसार, वाहिदी मानसिक और रणनीतिक रूप से एक जवाबी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यदि अमेरिका फिर से ईरान पर हमला करने की कोशिश करता है, तो वाहिदी के नेतृत्व में ईरान का जवाब बहुत ही आक्रामक हो सकता है।
तेल आपूर्ति और वैश्विक दबाव की रणनीति
मौजूदा संघर्ष के दौरान, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास के समुद्री क्षेत्र में तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, और यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप की इस चेतावनी का जवाब देते हुए अहमद वाहिदी ने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान पर दोबारा हमला किया गया, तो यह लड़ाई केवल एक सीमित क्षेत्र तक ही नहीं रहेगी। वाहिदी ने कहा कि ईरान के दुश्मनों को ऐसी तबाही झेलनी पड़ेगी जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। उनके इस बयान से साफ है कि वह युद्ध को एक बड़े स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
क्रांति से सत्ता के शीर्ष तक का सफर
अहमद वाहिदी का जन्म 1958 में ईरान के शिराज शहर में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पूरी की। 1979 की प्रसिद्ध इस्लामिक क्रांति के बाद, वह सक्रिय रूप से ईरानी सत्ता और सैन्य ढांचे का हिस्सा बन गए। वह आईआरजीसी की विशिष्ट इकाई, कुद्स फोर्स के पहले कमांडर भी रह चुके हैं। उनके पास प्रशासनिक और सैन्य अनुभव का एक लंबा इतिहास है।
वाहिदी ईरान के रक्षा मंत्री और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 2022 में महसा अमीनी की मृत्यु के बाद ईरान में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान, अमेरिका ने उन पर नए प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका का दावा था कि वाहिदी ने प्रदर्शनकारियों, विशेषकर महिलाओं को डराने और धमकाने का काम किया था। आज के समय में, ईरान की भविष्य की सैन्य और राजनीतिक दिशा तय करने में अहमद वाहिदी सबसे प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे हैं।
