भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को एक बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है और राघव चड्ढा को राज्यसभा की याचिका समिति (पिटीशन कमेटी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उनके हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के कुछ समय बाद हुई है। इस निर्णय को उनके संसदीय करियर में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो उनकी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत के साथ आया है।
पुनर्गठित समिति की संरचना और सदस्य
पी. राधाकृष्णन ने इस समिति के लिए सदन के 10 सदस्यों के एक पैनल को नामित किया है। राज्यसभा द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राघव चड्ढा को इस समिति का चेयरमैन बनाया गया है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभापति ने इस पैनल का पुनर्गठन 20 मई से प्रभावी कर दिया है। यह समिति संसदीय कामकाज में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में कार्य करती है।
इस 10 सदस्यीय समिति में राघव चड्ढा के अलावा 9 अन्य सांसदों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। याचिका समिति के सदस्यों की सूची में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाषिश खुंटिया, रवांग्रा नरजारी और पी. संदोष कुमार के नाम शामिल हैं। इन नियुक्तियों के संबंध में राज्यसभा सचिवालय द्वारा 21 मई को औपचारिक अधिसूचना जारी की गई थी।
संसद की सबसे पुरानी समिति का गौरवशाली इतिहास
राज्यसभा सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार, याचिका समिति भारतीय संसद की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक समितियों में से एक है। इस समिति की जड़ें औपनिवेशिक काल के दौरान विधायी विधानसभा (लेजिस्लेटिव असेंबली) के समय से जुड़ी हुई हैं। इसकी औपचारिक शुरुआत 15 सितंबर 1921 को हुई थी, जब तत्कालीन काउंसिल ऑफ स्टेट में एक सदस्य द्वारा लाए गए प्रस्ताव के माध्यम से इसे स्थापित किया गया था। तब से लेकर आज तक, यह समिति संसदीय लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।
समय के साथ इस समिति के अधिकारों और कार्यक्षेत्र में भी बड़े बदलाव आए हैं। वर्ष 1964 तक, राज्यसभा में याचिकाएं केवल उन विधेयकों या मामलों तक सीमित थीं जो संसद के उच्च सदन में लंबित थे। हालांकि, 1964 में राज्यसभा की प्रक्रिया के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जिससे समिति का दायरा काफी बढ़ गया। नए नियमों के तहत, अब आम जनता के हितों से जुड़े किसी भी विषय पर याचिकाएं पेश की जा सकती हैं। इस बदलाव ने आम नागरिकों को अपनी समस्याओं और सुझावों को सीधे संसद तक पहुँचाने का एक सशक्त मंच प्रदान किया है।
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और पार्टी की स्थिति
राघव चड्ढा की यह नियुक्ति हाल के राजनीतिक बदलावों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि राघव चड्ढा हाल ही में आम आदमी पार्टी (आप) के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। भाजपा में शामिल होने वाले इन सांसदों में संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम शामिल हैं। इन सात सांसदों के पाला बदलने से राज्यसभा में दलों की संख्यात्मक स्थिति में बड़ा फेरबदल हुआ है।
इन नए सदस्यों के शामिल होने के बाद, राज्यसभा में भाजपा के सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इसके विपरीत, आम आदमी पार्टी की सदस्य संख्या सदन में घटकर केवल 3 रह गई है। इस राजनीतिक बदलाव के बाद ही राघव चड्ढा को याचिका समिति के अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जो सदन की कार्यवाही में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
