ईरान की सैन्य तैयारी: 1000 मिसाइलें और 50 गुप्त लॉन्चर फिर से सक्रिय, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान ने अपने 50 गुप्त भूमिगत लॉन्चरों को फिर से सक्रिय कर लिया है, जिससे वह एक साथ 1000 मिसाइलें दागने में सक्षम हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन और रूस की मदद से ईरान ने अपनी 70 प्रतिशत मिसाइल क्षमता वापस पा ली है और उसके पास अब 2100 मिसाइलें हैं।

अमेरिका के साथ जारी छिटपुट सैन्य झड़पों के बीच ईरान की सैन्य शक्ति और उसके हथियारों के जखीरे से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने जमीन के नीचे स्थित अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को फिर से मजबूत कर लिया है। ईरान ने अपने 50 गुप्त लॉन्चरों को फिर से सक्रिय कर दिया है, जिससे उसकी मारक क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। इन सक्रिय लॉन्चरों के माध्यम से ईरान अब एक साथ 1000 मिसाइलें दागने की क्षमता रखता है। इसके अतिरिक्त, ईरान के पास इस समय हजारों की संख्या में ड्रोन मौजूद हैं, जिनका उपयोग वह किसी भी संभावित युद्ध की स्थिति में कर सकता है। ईरान का स्पष्ट रूप से कहना है कि यदि भविष्य में युद्ध की स्थिति बनती है, तो उसके ये हथियार खाड़ी देशों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ईरान की विशेष नजर संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब पर बनी हुई है।

ईरान की मिसाइल क्षमता और पुनर्प्राप्ति का विश्लेषण

ईरान के हथियारों की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो पता चलता है कि उसके पास इस समय लगभग 2100 मिसाइलें मौजूद हैं। वाशिंगटन पोस्ट द्वारा 7 मई को खुफिया अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था कि ईरान ने युद्ध से पहले की अपनी मिसाइल क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा फिर से हासिल कर लिया है। युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के पास करीब 3000 बैलिस्टिक मिसाइलें होने का अनुमान लगाया गया था। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान के 69 गुप्त लॉन्चर नष्ट कर दिए गए थे। हालांकि, ईरान ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए इनमें से 50 लॉन्चरों को फिर से सक्रिय और उपयोग के लिए तैयार कर लिया है। वर्तमान में ईरान के पास कुल मिलाकर लगभग 100 मिसाइल लॉन्चर हैं, जिनमें से 50 को गुप्त रूप से सक्रिय बताया जा रहा है।

शाहेद ड्रोन और खाड़ी देशों पर खतरा

मिसाइलों के अलावा ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके ड्रोन माने जाते हैं। ईरान के पास शाहेद ड्रोन का एक विशाल जखीरा है, जिनकी संख्या हजारों में बताई जाती है। इन शाहेद ड्रोनों ने पिछले संघर्षों के दौरान खाड़ी देशों में भारी तबाही मचाई थी और आज भी ये ईरान की युद्ध रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके हथियारों की पहुंच खाड़ी के प्रमुख देशों तक है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं।

चीन और रूस से मिली तकनीकी सहायता

एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान को अपने हथियारों के निर्माण और पुनर्प्राप्ति में चीन की कंपनियों से बड़ी मदद मिली है और चीन से ईरान को हथियारों के महत्वपूर्ण पुर्जे प्राप्त हुए हैं, जिनका उपयोग करके ईरान ने सस्ते रॉकेट और मिसाइलों का एक बड़ा जखीरा तैयार किया है। चीन के अलावा, रूस ने भी ईरान को हथियारों के पुर्जे और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई है। इन दोनों देशों को ईरान का प्रमुख सहयोगी माना जाता है, और उनकी मदद से ही ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने में सफल रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप का बीजिंग दौरा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

हथियारों की इस होड़ के बीच राजनीतिक घटनाक्रम भी तेजी से बदल रहे हैं। मई के मध्य में अपने बीजिंग दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि चीन ने उनसे वादा किया है कि वह ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा। हालांकि, चीन की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की गई, जिससे यह मामला अभी भी संदेहास्पद बना हुआ है।

शांति स्थापना के लिए कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता

युद्ध की तैयारियों और सैन्य विस्तार के बीच शांति की कोशिशें भी जारी हैं। सीजफायर के बाद अब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत का दौर शुरू हुआ है। इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देश इस बात का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं कि मध्य पूर्व में शांति कैसे स्थापित की जाए और तनाव को कैसे कम किया जाए। हालांकि, एक तरफ जहां शांति की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ईरान द्वारा 1000 मिसाइलें दागने की क्षमता वाले 50 गुप्त लॉन्चरों को सक्रिय करना दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।