मिडिल ईस्ट में ग्रेटर इजराइल की आहट? इजराइली सेना ने कब्जाई 1000 वर्ग किमी जमीन

एक रिपोर्ट के अनुसार हमास हमले के बाद इजराइल ने गाजा, लेबनान और सीरिया में करीब 1000 वर्ग किमी जमीन पर नियंत्रण कर लिया है। यह इजराइल की 1949 की सीमाओं का लगभग 5 प्रतिशत है। इस सैन्य विस्तार ने मिडिल ईस्ट में ग्रेटर इजराइल की बहस को फिर से छेड़ दिया है।

हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजराइल ने अपनी सैन्य और रणनीतिक नीति को पूरी तरह से बदल दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक तरीके से काम कर रही है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब तीन साल के दौरान इजराइल ने गाजा, लेबनान और सीरिया में लगभग 1000 वर्ग किमी जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह विशाल इलाका इजराइल की 1949 की सीमाओं का लगभग 5 प्रतिशत माना जा रहा है। इसी सैन्य विस्तार की वजह से अब मिडिल ईस्ट में ग्रेटर इजराइल की अवधारणा को लेकर चर्चा और चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा घेरे का निर्माण

रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल द्वारा कब्जाई गई जमीन का सबसे बड़ा हिस्सा दक्षिणी लेबनान में स्थित है और इजराइली सेना वहां सीमा से कई किमी अंदर तक प्रवेश कर चुकी है और इस इलाके को एक स्थायी सिक्योरिटी जोन के रूप में विकसित कर रही है। इजराइल का तर्क है कि इस सुरक्षा क्षेत्र के निर्माण से हिज्बुल्लाह को सीमा के पास से हमले करने से रोका जा सकेगा और उत्तरी इजराइल के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पिछले महीने अपने संबोधन में कहा था कि दुश्मन इजराइल को आग के घेरे में घेरना चाहता था, लेकिन अब इजराइल ने अपने चारों ओर सुरक्षा का एक मजबूत घेरा बना लिया है और इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी स्पष्ट किया है कि सेना लितानी नदी तक के इलाके पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।

गाजा में बदलती भौगोलिक स्थिति

गाजा पट्टी में इजराइली सेना की पकड़ अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है और वहां के आधे से ज्यादा इलाके पर इजराइल का नियंत्रण हो चुका है। इजराइल ने गाजा में एक अतिरिक्त बफर जोन का निर्माण किया है ताकि भविष्य के खतरों को टाला जा सके। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस सैन्य कार्रवाई की वजह से करीब 20 लाख लोग अब गाजा के केवल 40 प्रतिशत हिस्से में रहने को मजबूर हो गए हैं। सीमा के पास स्थित कई गांवों और शहरों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया है और वे अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। नेतन्याहू ने साफ तौर पर कहा है कि इजराइली सेना इन रणनीतिक क्षेत्रों से वापस नहीं जाएगी।

सीरिया में इजराइल की बढ़ती सैन्य मौजूदगी

सीरिया में बशर अल-असद सरकार की स्थिति कमजोर होने का फायदा उठाते हुए इजराइल ने वहां भी अपनी सैन्य मौजूदगी को काफी विस्तार दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली सेना ने माउंट हर्मोन से लेकर दक्षिणी सीरिया तक के करीब 233 वर्ग किमी इलाके में अपनी पकड़ को बेहद मजबूत कर लिया है। इजराइली सुरक्षा बलों ने सीरिया के भीतर 50 किमी अंदर तक के इलाकों में छापेमारी की है। हालांकि इजराइल और सीरिया के बीच सुरक्षा समझौते को लेकर कुछ बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। वर्तमान में सीरिया में इजराइल के कई सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, हालांकि सुरक्षा कारणों से दोनों देशों ने उनकी सटीक लोकेशन का खुलासा नहीं किया है।

ग्रेटर इजराइल को लेकर अरब देशों में डर

इजराइल के इस क्षेत्रीय विस्तार ने अरब देशों के बीच इस डर को पैदा कर दिया है कि यह कब्जा अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी हो सकता है। इजराइल के भीतर भी कट्टरपंथी नेता और अतिराष्ट्रवादी संगठन लंबे समय से सीमाओं को बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने तो लेबनान की लितानी नदी तक को इजराइल की नई सीमा बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, कुछ सांसदों ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा करने और वहां की मूल आबादी को हटाने की मांग भी उठाई है। हालांकि, इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार का कहना है कि इजराइल की लेबनान में क्षेत्रीय विस्तार की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। इसके बावजूद, अरब अधिकारियों का मानना है कि जो बातें पहले इजराइल में कट्टरपंथी मानी जाती थीं, वे अब धीरे-धीरे सरकारी नीति का हिस्सा बनती जा रही हैं।