जयपुर सियासत: मदन राठौड़ ने पहनाया भाजपा का दुपट्टा, निर्दलीय पार्षद मोहम्मद रईस खान का इनकार

जयपुर नगर निगम में बोर्ड गठन की खींचतान के बीच वार्ड 109 के निर्दलीय पार्षद मोहम्मद रईस खान के भाजपा में शामिल होने के दावे पर विवाद खड़ा हो गया है, रईस खान ने इसे भ्रामक बताया है।

जयपुर नगर निगम में निकाय चुनाव के संपन्न होने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच वार्ड नंबर 109 से निर्दलीय पार्षद के रूप में जीत दर्ज करने वाले मोहम्मद रईस खान का मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की ओर से रईस खान के पार्टी में शामिल होने की कुछ तस्वीरें सार्वजनिक की गई थीं, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई। गुरुवार की शाम को भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने रईस खान को भाजपा का दुपट्टा पहनाया और दावा किया कि पार्टी का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद रईस खान ने एक नया बयान जारी कर सबको चौंका दिया।

रईस खान का पलटवार और कांग्रेस के प्रति निष्ठा

भाजपा के दावे के विपरीत, निर्दलीय पार्षद मोहम्मद रईस खान ने भाजपा में शामिल होने की खबरों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक करार दिया है और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस विचारधारा से जुड़े हुए हैं और भविष्य में भी कांग्रेस में ही रहेंगे। रईस खान ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि वे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से केवल एक शिष्टाचार भेंट करने के लिए गए थे और उनका आरोप है कि उस मुलाकात के दौरान उन्हें भाजपा का दुपट्टा पहना दिया गया और फिर उसे गलत तरीके से प्रचारित किया गया। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए रईस खान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वे गले में कांग्रेस का दुपट्टा डाले नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का ऑफर जरूर दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया।

भाजपा की ओर से जारी की गई तस्वीर

मदन राठौड़ का दावा और वीडियो पर सवाल

दूसरी ओर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ अपने दावे पर अडिग हैं। उन्होंने कहा है कि मोहम्मद रईस खान भाजपा के साथ ही हैं और उनके द्वारा जारी किया गया वीडियो पूरी तरह से फेक है और राठौड़ के अनुसार, शुक्रवार की सुबह ही रईस खान ने उनसे दोबारा मुलाकात की थी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस मुलाकात के बाद रईस खान अजमेर दरगाह के लिए रवाना हो गए थे और भाजपा की ओर से जारी की गई तस्वीरों में रईस खान स्पष्ट रूप से भाजपा का दुपट्टा पहने हुए दिखाई दे रहे थे और पार्टी ने इसे अपनी सदस्यता अभियान की सफलता के रूप में पेश किया था। अब दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों ने इस मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है।

जयपुर नगर निगम का चुनावी गणित

इस पूरे घटनाक्रम ने निकाय चुनाव के बाद निर्दलीय पार्षदों की अहमियत को एक बार फिर साबित कर दिया है। जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों के लिए हुए चुनाव में शुरुआती नतीजों के अनुसार भाजपा को 78 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 53 सीटें आई थीं और 15 सीटों पर निर्दलीयों ने कब्जा जमाया था। हालांकि, चार वार्डों में पुनर्मतदान होने के बाद कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है, जबकि भाजपा अभी भी 78 सीटों पर बनी हुई है। तकनीकी रूप से भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिशें राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

वार्ड 109 के नतीजे और रईस खान की जीत

वार्ड नंबर 109 में मोहम्मद रईस खान की जीत काफी प्रभावशाली रही है। उन्होंने एक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए कुल 5150 वोट हासिल किए। रईस खान ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 558 वोटों के अंतर से हराकर जीत का परचम लहराया था। इतनी बड़ी संख्या में वोट हासिल करने और जीत दर्ज करने के कारण ही वे दोनों प्रमुख दलों की नजरों में बने हुए हैं। फिलहाल, रईस खान के रुख और भाजपा के दावों के बीच जयपुर की राजनीति में सस्पेंस बना हुआ है कि आखिर बोर्ड गठन के समय निर्दलीयों की भूमिका क्या रहने वाली है।