चीन की राजनीति और वैश्विक पटल पर एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आ रहा है जिसके तहत शी जिनपिंग अगले पांच साल तक चीन के राष्ट्रपति पद पर बने रह सकते हैं। इस संबंध में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में ऐतिहासिक फैसला होने जा रहा है। सोमवार को देश की राजधानी बीजिंग में इस अहम बैठक की शुरुआत हो चुकी है, जो कुल चार दिनों तक पूरी तरह से बंद कमरे में चलने वाली है। इस बंद कमरे की उच्च स्तरीय बैठक में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के कुल 165 सदस्य शामिल हो रहे हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो शी जिनपिंग ने सबसे पहले वर्ष 2012 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में कमान संभाली थी और उसके ठीक बाद वर्ष 2013 में उन्होंने आधिकारिक रूप से चीन के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली थी।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, वर्तमान में आयोजित की जा रही इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य शी जिनपिंग के राजनीतिक नेतृत्व को और अधिक आगे बढ़ाना तथा उनके दूरदर्शी विजन को धरातल पर पूरी तरह से उतारने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है। इस चार दिवसीय मैराथन बैठक के सबसे अंतिम और चौथे दिन शी जिनपिंग स्वयं उपस्थित सभी सदस्यों को संबोधित करेंगे और अपने आगामी एजेंडे को देश के सामने रखेंगे। इस बैठक का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि इसमें देश की आगामी दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।
केंद्रीय समिति की बैठक में चार बड़े प्रस्ताव पेश किए गए
कम्युनिस्ट पार्टी की इस महत्वपूर्ण केंद्रीय समिति की बैठक में कुल चार बड़े प्रस्ताव पेश किए गए हैं, जो आने वाले समय में चीन की आंतरिक और बाहरी नीतियों की रूपरेखा तय करेंगे।
- सेल्फ गवर्नेंस पर फोकस: सेंट्रल कमेटी की इस बैठक में शी जिनपिंग द्वारा जो पहला प्रमुख प्रस्ताव पेश किया गया है, उसमें सेल्फ गवर्नेंस यानी स्व-शासन पर विशेष फोकस करने का स्पष्ट जिक्र किया गया है। जिनपिंग की मंशा है कि चीन के भीतर एक मजबूत सेल्फ गवर्नेंस सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि देश का सर्वांगीण विकास सबसे छोटे यानी जमीनी स्तर पर भी सुचारू रूप से हो सके।
- भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: जिनपिंग की तरफ से जो दूसरा प्रस्ताव पेश किया गया है, उसका सीधा संबंध देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से है। प्रतिष्ठित प्रकाशन साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों के अंतराल में सेंट्रल कमेटी के कुल 35 सदस्यों को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के कारण उनके पदों से हटाया जा चुका है, जो इस नीति की कड़ाई को दर्शाता है।
- नए लोगों को बड़े पद मिलेंगे: केंद्रीय समिति के इस नए प्रस्ताव में संगठन और प्रशासन के स्तर पर नए तथा प्रतिभाशाली लोगों को बड़े और महत्वपूर्ण पद सौंपे जाने का विशेष जिक्र किया गया है। मौजूदा समय की बात करें तो चीन की सेना में उपाध्यक्ष का अत्यंत महत्वपूर्ण पद पूरी तरह से रिक्त चल रहा है। इसके अलावा, चीनी सरकार की यह सक्रिय कोशिश है कि अधिक से अधिक नए और युवा लोगों को नीतिगत डिसिजन मेकिंग यानी निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए ताकि शासन में नया दृष्टिकोण आ सके।
- ग्लोबल इन्वेस्टमेंट लाने पर जोर: सेंट्रल कमेटी की इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के भीतर ग्लोबल इन्वेस्टमेंट यानी वैश्विक निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उचित तौर-तरीके और मार्ग खोजने के संबंध में चीन एक विशेष मिशन के तहत आने वाले आगामी दिनों में काम करेगा। बैठक के दौरान इसी पूरी कार्ययोजना और रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
शी जिनपिंग की हेल्थ रिपोर्ट भी होगी पेश
इस उच्च स्तरीय और गोपनीय बैठक से जुड़ी एक अन्य बड़ी खबर के मुताबिक, केंद्रीय समिति की इस बैठक के दौरान शी जिनपिंग की आधिकारिक स्वास्थ्य रिपोर्ट भी पेश की जाएगी और वर्तमान में तिहत्तर वर्ष (73) के हो चुके शी जिनपिंग की सेहत और स्वास्थ्य को लेकर समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रकार की अटकलें लगती रही हैं। हाल ही में उनके द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों के आधिकारिक दौरों को पूरा करने के बाद उनके अस्वस्थ होने या बीमार पड़ने की खबरें भी मीडिया और कूटनीतिक गलियारों में काफी प्रमुखता से सामने आई थीं, जिस पर इस रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चीन की सेंट्रल कमेटी के इतिहास की अगर बात करें तो इसमें पहले कुल 200 सदस्य हुआ करते थे, लेकिन पिछले पांच वर्षों की समयावधि में विभिन्न कारणों और मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के मामलों के चलते 35 लोगों को उनके पदों से हटाया जा चुका है। इन तमाम प्रशासनिक फेरबदल और निष्कासन के बाद वर्तमान में इस महत्वपूर्ण कमेटी में कुल 165 सदस्य सक्रिय रूप से बचे हैं। इस पूरी बैठक का एकमात्र और सबसे बड़ा उद्देश्य शी जिनपिंग के नेतृत्व को निर्विवाद रूप से और अधिक आगे बढ़ाना तथा देश की सत्ता पर उनकी पकड़ को और अधिक मजबूत करना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
