भारत-पाक के बीच 3 महीने से चल रही 'गुप्त वार्ता', महबूबा मुफ्ती का बड़ा दावा

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पुंछ में दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले तीन महीनों से विदेशों में गुप्त वार्ता चल रही है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त राजनयिक और सैन्य अधिकारी इस संवाद में शामिल हैं। मुफ्ती ने शांति के लिए बातचीत और पुराने व्यापारिक रास्तों को खोलने की वकालत की।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला दावा किया है। पुंछ में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले तीन महीनों से 'गुप्त स्तर' पर बातचीत चल रही है। मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी काफी तीखी और कड़वाहट भरी नजर आती हो, लेकिन पर्दे के पीछे संवाद की प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच इस संवाद की पुरजोर वकालत करते हुए इसे क्षेत्र में शांति का एकमात्र रास्ता बताया।

तीन महीने से जारी गुप्त कूटनीति का दावा

महबूबा मुफ्ती ने अपने संबोधन के दौरान विस्तार से बताया कि यह बातचीत किस स्तर पर हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों से भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि गुप्त रूप से चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में सेवानिवृत्त राजनयिक, पूर्व सैन्य अधिकारी (रिटायर्ड जनरल) और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिनिधि शामिल हैं और मुफ्ती ने कहा कि ये लोग विदेशों में बैठकर पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ गहन चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में जनता से पूछा कि क्या उन्हें पता है कि पिछले तीन महीनों से पाकिस्तान के साथ चोरी-छिपे बातचीत चल रही है? उन्होंने इसे 'ऑपरेशन सिंदूर' या इसी तरह के किसी नाम से संबोधित किए जाने वाले अभियानों के समानांतर चलने वाली एक गुप्त कूटनीतिक प्रक्रिया बताया।

मुफ्ती मोहम्मद सईद का विजन और शांति का ब्लूप्रिंट

अपने भाषण के दौरान महबूबा मुफ्ती ने अपने पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के योगदान और उनके नजरिए को याद किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के जटिल मुद्दे का समाधान केवल और केवल बातचीत के जरिए ही संभव है। उन्होंने दावा किया कि मुफ्ती मोहम्मद सईद द्वारा तैयार किया गया ब्लूप्रिंट आज भी प्रदेश में स्थायी शांति स्थापित करने का सबसे प्रभावी और कारगर रास्ता है। उन्होंने अपने पिता के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि मुफ्ती साहब हमेशा मानते थे कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चाहे जितना भी विरोध क्यों न करे, अंततः उन्हें बातचीत की मेज पर आना ही पड़ेगा। उनके अनुसार, बातचीत के अलावा और कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है और मुफ्ती साहब के विजन के बिना इस मसले का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।

हिंसा का मानवीय पक्ष और 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र

महबूबा मुफ्ती ने हालिया हिंसा और संघर्षों पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कुछ विशिष्ट घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काश यह गुप्त बातचीत 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी स्थितियों से पहले शुरू हो गई होती। उन्होंने अत्यंत भावुक होते हुए उन सिख भाइयों (सरदार भाइयों) को याद किया जो शहीद हो गए। इसके साथ ही उन्होंने जुड़वां भाई-बहन, जोया और ज़ैन का विशेष रूप से जिक्र किया, जो अपने घर के आंगन में खेलते समय हिंसा की भेंट चढ़ गए और शहीद हो गए। मुफ्ती ने कहा कि यदि समय रहते बातचीत प्रभावी होती, तो आज ये मासूम और जवान हमारे बीच होते। उन्होंने क्षेत्र में हो रही बर्बादी पर गहरी चिंता जताई और कहा कि हिंसा से केवल नुकसान ही हुआ है।

व्यापारिक मार्गों की बंदी और आर्थिक प्रभाव

पीडीपी प्रमुख ने अपनी सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई नियंत्रण रेखा (LoC) पार व्यापार और यात्रा सेवाओं की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से रावलाकोट मार्ग का जिक्र करते हुए कहा कि इसे इसलिए खोला गया था ताकि सीमा के दोनों ओर व्यापार बढ़ सके और स्थानीय लोगों के हाथों में हथियारों के बजाय रोजगार के अवसर आएं। उनका उद्देश्य था कि यहां से सामान सीमा पार जाए और वहां से पैसा आए, जिससे क्षेत्र में हिंसा की घटनाओं में कमी आए। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया कि उस महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते को अब बंद कर दिया गया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और शांति प्रयासों को धक्का लगा है।

अनुच्छेद 370 और क्षेत्रीय मांगें

वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के फैसले पर बोलते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इसका सबसे बुरा प्रभाव पीर पंजाल और चिनाब घाटी के लोगों पर पड़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर इस क्षेत्र की जायज मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मुफ्ती ने याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने क्षेत्र के लिए एक अलग प्रशासनिक डिवीजन और पुंछ के मेंढर इलाके को 'हिल डिस्ट्रिक्ट' का दर्जा देने की मांग प्रमुखता से उठाई थी। उन्होंने कहा कि यह मांग इसलिए की गई थी ताकि स्थानीय निवासियों को छोटे-छोटे सरकारी और प्रशासनिक कार्यों के लिए जम्मू या श्रीनगर की लंबी यात्रा न करनी पड़े और उन्हें उनके घर के पास ही सुविधाएं मिल सकें।

अपने संबोधन के समापन में महबूबा मुफ्ती ने बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और समाज के गरीब व जनजातीय समुदायों के साथ हो रहे कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने विशेष रूप से गुज्जर और बकरवाल समुदायों का पक्ष लेते हुए कहा कि सरकार इन गरीब लोगों को भूमि कब्जाधारी बताकर प्रताड़ित कर रही है, जो कि गलत है। अंत में, उन्होंने क्षेत्र के युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास जताते हुए आगामी पंचायत चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया ताकि वे अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकें।