इंडिया / नासा ने जारी की विक्रम लैंडर की लैंडिंग वाली जगह की तस्वीरें कहा हुई थी हार्ड लैंडिंग

Live Hindustan : Sep 27, 2019, 10:08 AM

नई दिल्ली. चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) को लेकर नासा (NASA) ने एक बड़ा खुलासा किया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शुक्रवार को चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की लैंडिंग वाली जगह की तस्वीरें जारी की है, जिसमें कहा गया है कि चांद की सतह पर विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई। नासा ने चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे अपने लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर (LRO) को विक्रम लैंडर के लैंडिंग साइट के ऊपर से गुजारा था, उसके ऑर्बिटर से कैद तस्वीरों को जारी किया है। नासा ने उस जगह की तस्वीरें भी जारी कीं हैं, जहां साउथ पोल पर विक्रम की लैंडिंग होनी थी।, तस्वीर में धुल दिखी है। हालांकि, विक्रम कहां गिरा इस बारे में पता नहीं चला पाया है।

नासा ने कहा कि विक्रम लैंडर की काफी हार्ड लैंडिंग हुई थी और चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की लैंडिंग का सटीक स्थान अभी तक नहीं पता चल पाया है। गौरतलब है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर लैंड करने से कुछ मिनट पहले देश के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान -2 के विक्रम लैंडर से संपर्क खो दिया था।

नासा ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया, 'चंद्रमा की सतह पर नासा की हार्ड लैंडिंग हुई, यह स्पष्ट है। स्पेसक्राफ्ट किस लोकेशन पर लैंड हुआ यह अभी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता। तस्वीरें केंद्र से 150 किलोमीटर दूरी से ली गई हैं। अक्टूबर में  लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर दोबारा प्रयास करेगा। 

'गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के एलआरओ मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जॉन कैलर ने एक बयान में कहा कि एलआरओ 14 अक्टूबर को दोबारा उस समय संबंधित स्थल के ऊपर से उड़ान भरेगा जब वहां रोशनी बेहतर होगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-2 के विक्रम मॉड्यूल का सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने का प्रयास तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो पाया था। लैंडर का आखिरी क्षण में जमीनी केंद्रों से संपर्क टूट गया था।

नासा अब 14 अक्टूबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से अंधेरा छंटने के बाद एक बार फिर अपने लूनर रिकॉनेसा ऑर्बिटर (एलआरओ) के कैमरे से विक्रम लैंडर की लोकेशन जानने और उसकी तस्वीर लेने की कोशिश करेगा। बता दें कि पहले भी एजेंसी ऐसी कोशिशें कर चुकी है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।