जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस समय हलचल तेज हो गई है क्योंकि प्रदेश की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान के तहत करीब 18 से 20 विधायकों ने संगठनात्मक ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव करने और कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को उनके पदों से हटाने की मांग करते हुए एक औपचारिक ज्ञापन तैयार किया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन वरिष्ठ और असंतुष्ट विधायकों ने यह महत्वपूर्ण ज्ञापन पार्टी के शीर्ष नेता और अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को सौंप दिया है, जिसमें पार्टी के भीतर सुधार की कई तीखी मांगें रखी गई हैं।
विधायकों ने स्पष्ट किया, वे नाराज हैं लेकिन बागी नहीं
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बाद असंतुष्ट विधायकों की ओर से यह साफ करने की कोशिश की गई है कि इसे किसी भी तरह की बगावत या पार्टी तोड़ने की कोशिश न समझा जाए। विधायकों का कहना है कि वे पार्टी नेतृत्व से निश्चित रूप से नाराज हैं, लेकिन वे किसी भी रूप में बागी नहीं हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पार्टी को किसी भी प्रकार से कमजोर करना नहीं है, बल्कि इसके विपरीत इसे और अधिक मजबूत बनाना है। असंतुष्ट विधायकों का दृढ़ तर्क है कि पार्टी को दोबारा से मजबूत करने और संगठन के भीतर पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान समय में बड़े और कड़े बदलाव करना बेहद जरूरी हो चुका है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
पुराने मंत्रियों को हटाने और नए चेहरों को मौका देने की पुरजोर मांग
प्राप्त सूत्रों के अनुसार, इन असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने सीधे तौर पर मंत्रिमंडल में फेरबदल और बदलाव की बड़ी मांग रखी है। उनकी मुख्य मांग यह है कि डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी समेत सरकार के सभी पुराने और मौजूदा मंत्रियों को उनके पदों से तुरंत हटाया जाए और उनकी जगह पर नए चेहरों को सरकार में शामिल होने का अवसर दिया जाए। विधायकों का मानना है कि जब तक प्रशासन और सरकार में नए लोगों को मौका नहीं मिलेगा, तब तक जनता के बीच सही संदेश नहीं जा पाएगा और पार्टी की कार्यशैली में सुधार की जो उम्मीद जनता ने लगाई थी, वह पूरी नहीं हो सकेगी।
नासिर असलम वानी को पद से हटाने की मांग और विशेष तर्क
मंत्रिमंडल के अलावा, असंतुष्ट विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम वानी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग भी जोर-शोर से उठाई है। इन विधायकों का कड़ा तर्क यह है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में अपनी हार का सामना करने के बावजूद नासिर असलम वानी को कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा और तमाम सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं। विधायकों का यह सवाल है कि चुनाव हारने वाले व्यक्ति को इतना बड़ा और महत्वपूर्ण रुतबा क्यों दिया जा रहा है, जबकि चुनाव जीतने वाले विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठन में वह तवज्जो नहीं मिल रही है जिसके वे वास्तविक रूप से हकदार हैं।
घोषणापत्र लागू करने और अनुच्छेद 370-35A की बहाली पर विशेष जोर
इस पूरे असंतोष और आंतरिक कलह के दौरान असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को पूरी तरह और बिना किसी देरी के लागू करने की पुरजोर मांग भी रखी है। इस मांग पत्र में सबसे खास तौर पर अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A को दोबारा से बहाल करवाने के लिए हरसंभव और पुरजोर कोशिश करने की विशेष मांग शामिल की गई है। विधायकों का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि पार्टी और सरकार को कुछ चुनिंदा लोगों की निजी जागीर बिल्कुल नहीं बनने दिया जा सकता है। संगठन के भीतर पूर्ण पारदर्शिता, उच्च स्तर की जवाबदेही और सामूहिक नेतृत्व की एक मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए ताकि हर कार्यकर्ता और विधायक की आवाज को उचित सम्मान मिल सके।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद तेजी से बढ़ी पार्टी के भीतर नाराजगी
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर सुलग रहा यह असंतोष उस समय और अधिक तेजी से बाहर आ गया, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की तरफ से मंत्रिमंडल में फेरबदल और उसका विस्तार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ गई, जिसमें मुख्य रूप से मुबारक गुल, लारमी और नजीर गुरेजी जैसे अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बढ़ती हुई नाराजगी को शांत करने और दूर करने के एक विशेष प्रयास के तहत पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी का नया महासचिव नियुक्त किया था। हालांकि, श्रीनगर में असंतुष्ट विधायकों की एक गुप्त बैठक आयोजित होने के बाद, महज दो दिनों के भीतर ही उन्हें इस महत्वपूर्ण पद से अचानक हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान और कलह को देश और दुनिया के सामने और अधिक उजागर कर दिया।
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका
पार्टी की मुश्किलें और आंतरिक संकट उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया और और अधिक गंभीर हो गई, जब श्रीनगर के सांसद और बेहद प्रभावशाली शिया समुदाय के धर्मगुरु आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने आगामी 3 नवंबर को अपने सांसद पद के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता से भी अपने इस्तीफे का औपचारिक ऐलान कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अब्दुल्ला परिवार और आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के बीच पिछले करीब एक साल से लगातार टकराव और अनबन की स्थिति बनी हुई थी, जो अंततः इस बड़े इस्तीफे के रूप में बाहर आई। इस प्रकार, नेशनल कॉन्फ्रेंस इस समय एक तरफ जहां चुनावी वादों और घोषणापत्र को लागू करने के दबाव से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर खड़े हुए इस बड़े संगठनात्मक और नेतृत्व संबंधी संकट ने उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला दोनों की मुश्किलों को बहुत अधिक बढ़ा दिया है।
