रविवार की सुबह, उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ाते हुए अपने पूर्वी तट से समुद्र में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। यह प्रक्षेपण ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ एक महत्वपूर्ण शिखर वार्ता के लिए चीन रवाना होने वाले थे। इस घटना ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दक्षिण कोरियाई सेना ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि वे किसी भी अन्य संभावित प्रक्षेपण के मद्देनजर पूरी तरह अलर्ट पर हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
कूटनीतिक संवेदनशीलता और मिसाइल प्रक्षेपण का समय
यह मिसाइल प्रक्षेपण कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील समय पर हुआ है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिलने के लिए कुछ ही घंटों में उड़ान भरने वाले थे। इस शिखर वार्ता का मुख्य एजेंडा उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता पर चर्चा करना था। ऐसे महत्वपूर्ण संवाद से ठीक पहले उत्तर कोरिया द्वारा मिसाइल दागना स्पष्ट रूप से एक जानबूझकर किया। गया उकसावा है, जिसका उद्देश्य इन वार्ताओं को प्रभावित करना और अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करना है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों को दरकिनार करने की। उत्तर कोरिया की पुरानी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने रविवार सुबह हुए इस मिसाइल प्रक्षेपण की पुष्टि की है। हालांकि, मिसाइल की रेंज और उसकी सटीक क्षमता के बारे में विस्तृत विश्लेषण अभी जारी है। JCS ने यह भी स्पष्ट किया है कि दक्षिण कोरियाई सेना अमेरिकी सेना के साथ मिलकर स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी अप्रत्याशित घटना या अन्य संभावित प्रक्षेपण का सामना करने के लिए पूरी तरह से अलर्ट पर है। इस तरह की संयुक्त निगरानी और उच्च अलर्ट का उद्देश्य क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता को रोकना और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी इस संदिग्ध मिसाइल परीक्षण की पुष्टि की है, जो इस घटना की गंभीरता को दर्शाता है।
हालिया प्रक्षेपणों का सिलसिला
यह इस सप्ताह उत्तर कोरिया द्वारा किया गया पहला प्रक्षेपण नहीं है। इस सप्ताह की शुरुआत में भी उत्तर कोरिया ने घोषणा की थी कि उसने समुद्र में लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलें दागी हैं। इन लगातार प्रक्षेपणों से पता चलता है कि उत्तर कोरिया अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने और उनका प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही उसे अंतरराष्ट्रीय निंदा का सामना करना पड़े। 'रणनीतिक' और 'लंबी दूरी' जैसे शब्दों का उपयोग उसकी बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं और प्रौद्योगिकी में। प्रगति का संकेत देता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है।
दक्षिण कोरिया और चीन को कड़ा संदेश
इस समय मिसाइल का परीक्षण कर उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और चीन, दोनों को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। दक्षिण कोरिया के लिए, यह उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधी चुनौती है, जबकि चीन के लिए, यह उसकी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की क्षमता और उत्तर कोरिया पर उसके प्रभाव पर सवाल उठाता है। उत्तर कोरिया संभवतः यह दिखाना चाहता है कि वह किसी भी कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है और अपनी रक्षा क्षमताओं को विकसित करने के अपने अधिकार पर कायम है और यह कदम बीजिंग में होने वाली शिखर वार्ता के एजेंडे को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा और दोनों देशों के नेताओं को उत्तर कोरिया के व्यवहार पर एक मजबूत रुख अपनाने के लिए मजबूर कर सकता है।
किम जोंग उन की आंतरिक राजनीतिक प्रेरणाएँ
मिसाइल प्रक्षेपण के पीछे केवल बाहरी कूटनीतिक संदेश ही नहीं, बल्कि आंतरिक राजनीतिक प्रेरणाएँ भी हो सकती हैं और उत्तर कोरिया में जल्द ही सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की एक बड़ी कांग्रेस यानी सर्वोच्च बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले, किम जोंग उन अपनी रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों को जनता और पार्टी के सामने पेश करना चाहते हैं। इस तरह के सैन्य प्रदर्शन किम जोंग उन की नेतृत्व क्षमता और देश की सुरक्षा को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिससे पार्टी के भीतर उनकी स्थिति और मजबूत होती है। यह अपने लोगों के बीच राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को बढ़ावा देने का भी एक तरीका हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा हो।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव और आगे की राह
उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल प्रक्षेपणों का क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये प्रक्षेपण न केवल दक्षिण कोरिया और जापान जैसे पड़ोसी देशों के लिए खतरा पैदा करते हैं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अस्थिरता को भी बढ़ावा देते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन कृत्यों की अक्सर निंदा की है और उत्तर कोरिया। पर अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकने के लिए दबाव डाला है। हालांकि, उत्तर कोरिया ने लगातार इन अपीलों और प्रतिबंधों को नजरअंदाज किया है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की चीन यात्रा से पहले का यह प्रक्षेपण, भविष्य की कूटनीतिक वार्ताओं की जटिलता को दर्शाता है और। यह संकेत देता है कि उत्तर कोरियाई मुद्दा अभी भी क्षेत्र में सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में से एक बना हुआ है। आने वाले समय में, दक्षिण कोरिया और चीन के बीच होने वाली शिखर वार्ता में इस घटना पर गहन चर्चा होने की संभावना है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं।