प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पांच देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), द नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया युद्ध और ऊर्जा संकट के दोहरे दबाव का सामना कर रही है। जहां दुनिया के कई बड़े नेता वैश्विक संकटों से दूरी बना रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी संकट के बीच वॉर जोन में जाकर दुनिया को शांति और स्थिरता का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे भारत इस युद्ध संकट के बीच एक वैश्विक समाधानकर्ता के रूप में उभर रहा है।
वैश्विक नेतृत्व में एक बड़ा अंतर
इस यात्रा का समय बहुत महत्वपूर्ण है। अभी दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन के दौरे पर थे और बीजिंग में शी जिनपिंग से मुलाकात कर रहे थे। जिस वक्त दुनिया की दो बड़ी ताकतें शक्ति प्रदर्शन में व्यस्त थीं, ठीक उसी वक्त पीएम मोदी यूएई से पूरी दुनिया को शांति का संदेश दे रहे थे और यह संदेश इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट तेज है और उन समुद्री रास्तों पर खतरा मंडरा रहा है जहां से दुनिया को तेल की सप्लाई की जाती है। ट्रंप और जिनपिंग की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं, लेकिन भारत का लक्ष्य वैश्विक शांति स्थापित करना है।
यूएई के साथ रणनीतिक पेट्रोलियम समझौता
प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच हुई बातचीत भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित थी। इस वार्ता के बाद एक बहुत बड़ी डील सामने आई जिसने वैश्विक बाजार का ध्यान खींचा। भारत और यूएई ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर एक बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत यूएई अब भारत के स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व में 30 मिलियन यानी 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर कर सकेगा। यह केवल तेल के भंडारण का विषय नहीं है, बल्कि यह दो देशों के बीच अटूट भरोसे का प्रतीक है। जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से डरी हुई है, तब भारत अपने भविष्य के लिए सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है।
नीदरलैंड्स में 17 महत्वपूर्ण समझौते
यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड्स पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। एम्स्टर्डम और हेग में पीएम मोदी ने दुनिया को वैश्विक संकटों के प्रति आगाह किया और उनसे बाहर निकलने का रास्ता भी बताया। इस यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड्स के बीच 17 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सबसे प्रमुख समझौता सेमीकंडक्टर चिप निर्माण से जुड़ा है। डच कंपनी एएसएमएल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच हुआ यह समझौता भारत में तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकता है।
भारत पर बढ़ता वैश्विक भरोसा
पीएम मोदी का यह दौरा केवल एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं है, बल्कि इसे ग्लोबल क्राइसिस मैनेजमेंट का एक मॉडल माना जा रहा है। जिस समय ईरान की मिसाइलों ने यूएई को निशाना बनाया था, उस युद्ध क्षेत्र में जाकर शांति की बात करना भारत के बढ़ते कूटनीतिक कद को दर्शाता है। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत शांति के पक्ष में है और युद्ध का समाधान केवल संवाद से ही संभव है। इसी दौरान दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी भारत की प्रशंसा की और माना कि भारत जैसी क्षमता किसी अन्य देश में नहीं है।
स्वीडन, नॉर्वे और इटली का अगला पड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अब स्वीडन, नॉर्वे और अंत में इटली तक जाएगी। इस पूरे मिशन का एकमात्र संदेश यह है कि आज के दौर में अगर दुनिया को जोड़ने की ताकत किसी के पास है, तो वह भारत है। भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ वैश्विक कल्याण के लिए भी काम कर रहा है। पूरी दुनिया की निगाहें अब पीएम मोदी के अगले कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि वे युद्ध और अस्थिरता के बीच भी भविष्य की ठोस योजनाएं बनाने का हुनर दिखा रहे हैं।
