बेगुनाहों की हत्या बर्दाश्त नहीं…इजराइली संसद में हमास पर बरसे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइली संसद 'नेसेट' को संबोधित करते हुए 7 अक्टूबर के हमास हमलों की निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का आह्वान किया और भारत के अटूट समर्थन की पुष्टि की। इस दौरान उन्हें 'स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल' से सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दूसरी इजराइल यात्रा के दौरान इजराइली संसद 'नेसेट' को संबोधित किया। यरुशलम पहुंचने पर प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया गया, जहां इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने प्रोटोकॉल तोड़कर हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। नेसेट में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर को हुए आतंकवादी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और स्पष्ट किया कि बेगुनाह नागरिकों की हत्या किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस ऐतिहासिक संबोधन के दौरान इजराइली संसद ने प्रधानमंत्री मोदी को 'स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल' से सम्मानित किया, जो इस विधायी संस्था का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का आह्वान

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर के नरसंहार का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति दुनिया का नजरिया स्पष्ट होना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसके खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने हमास का नाम लेते हुए कहा कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाना सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। प्रधानमंत्री ने उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्होंने इस हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है।

भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक साझेदारी

संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत और इजराइल को 'नेचुरल पार्टनर' बताया और उन्होंने कहा कि दोनों देश न केवल सुरक्षा के क्षेत्र में बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास में भी एक-दूसरे के पूरक हैं। प्रधानमंत्री ने भारत द्वारा किए जा रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और वैश्विक आर्थिक गलियारों के निर्माण का उल्लेख किया। उन्होंने इजराइल को 'इनोवेशन का हब' बताते हुए कहा कि दोनों देश स्टार्टअप के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एआई समिट का उदाहरण देते हुए उन्होंने तकनीकी सहयोग को भविष्य की जरूरत बताया।

क्षेत्रीय शांति और गाजा शांति पहल

शांति स्थापना के प्रयासों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन किया और उन्होंने उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित यह पहल क्षेत्र में टिकाऊ शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान सहित पूरे क्षेत्र में स्थिरता के लिए बातचीत का पक्षधर है और उन्होंने कहा कि शांति का रास्ता चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा है।

ऐतिहासिक संबंध और सांस्कृतिक जुड़ाव

प्रधानमंत्री ने इजराइल के साथ भारत के सदियों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 4,000 से अधिक भारतीय सैनिकों के बलिदान का सम्मान किया। इसके साथ ही, उन्होंने इजराइल में योग की बढ़ती लोकप्रियता और वहां के युवाओं के टैलेंट की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि इजराइल ने रेगिस्तानी भूमि को उपजाऊ बनाकर जो करिश्मा किया है, वह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। उन्होंने इजराइली युवाओं को भारत में नवाचार और शोध के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का संबोधन और 'मोदी हग'

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें अपना 'प्रिय मित्र' और भारत को एक महान शक्ति बताया। नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजराइल केवल दोस्त नहीं बल्कि भाइयों की तरह हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चर्चित 'मोदी हग' का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी किसी को गले लगाते हैं, तो वह केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि वास्तविक भावनाओं का प्रकटीकरण होता है। नेतन्याहू ने भारत की उस महान सभ्यता की सराहना की जहां यहूदियों को कभी प्रताड़ित नहीं किया गया, बल्कि उनका हमेशा स्वागत किया गया। उन्होंने इस ऐतिहासिक समर्थन के लिए भारत का आभार व्यक्त किया।