राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भील प्रदेश की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और गुरुवार को विधानसभा परिसर में भारत आदिवासी पार्टी के विधायकों ने भील प्रदेश के गठन और मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान विधायकों ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आदिवासियों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
पारंपरिक वेशभूषा में प्रदर्शन और चेतावनी
भारत आदिवासी पार्टी के तमाम विधायक आज अपनी परंपरागत वेशभूषा में विधानसभा पहुंचे थे, जो उनके सांस्कृतिक गौरव और मांगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर मानगढ़ धाम को जल्द ही राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं दिया गया, तो वे सदन से लेकर सड़कों तक उग्र आंदोलन करेंगे। विधायकों का कहना था कि सरकार आदिवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मानगढ़ धाम की ऐतिहासिक शहादत
धरियावद से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक थावरचंद डामोर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और उनकी प्रमुख मांग मानगढ़ धाम को लेकर है। उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम आदिवासियों का एक महान शहादत स्थल है और इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाना चाहिए। डामोर ने बताया कि यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही है और जब तक मानगढ़ धाम को यह सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक वे इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे।
भाजपा सरकार पर तीखा हमला
विधायक डामोर ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले में भाजपा की नफरत भरी सोच उजागर हो रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी पहले आदिवासियों ने अपनी आजादी और अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। मानगढ़ में 1500 से ज्यादा आदिवासी शहीद हुए थे, लेकिन उनकी शहादत की लगातार अवहेलना की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक पहाड़ी नहीं है, बल्कि एक पवित्र शहीद स्थल है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के दौरों पर सवाल
विधायक ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि उस पहाड़ी पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे बड़े नेता आते हैं, लेकिन वहां आकर किए गए वादों से पलट जाना आदिवासियों के बलिदान पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह लड़ी जाएगी। डामोर ने भाजपा सरकार के पिछले शासन पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार ने कोई ठोस काम नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब इस सरकार से ऊब चुकी है और आगामी नगर निकाय तथा पंचायत चुनावों में जनता भाजपा को कड़ा सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
